वह मेरे बीज से माँ बनी

(Wah Mere Beej se ma Bani)

decodr.ru के प्रिय पाठको, आप सब को मेरा नमस्कार !

मैं भारत की राजधानी दिल्ली से सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के एक छोटे शहर में रहता हूँ। मैं Hot Sex Story का एक नियमित पाठक हूँ और मुझे उस पर प्रकाशित कहानियाँ पढ़ना अच्छा लगता है।

आज मैं अपने जीवन में घटने वाली एक सच्ची कहानी का विवरण आप सबको बताना चाहूँगा और आशा करता हूँ कि आपको ज़रूर पसंद आएगी।

यह घटना आज से लगभग तीन वर्ष पहले की है जब मैं अपने एक दोस्त की शादी में उसके गाँव गया था।

जैसा शादी वाले घर में अक्सर होता है कि अधिक मेहमानों के आ जाने से घर में जगह की कमी होने जाती है।
इसलिए मेरे दोस्त ने मेरे सोने की व्यवस्था अपने घर के बिल्कुल साथ के घर में रहने वाले पड़ोसी विकास के घर कर दी थी।

विकास की उम्र लगभग तीस वर्ष की थी और वह अपनी सताईस वर्षीय पत्नी निशा के साथ उस घर में रहता था।
जब मैं अपने दोस्त के साथ अपना सामान रखने के लिए विकास के घर गया तब मुझे निशा को देखने का अवसर मिला।

उसे देख कर तो मैं अपने होश ही खो बैठा, क्या गज़ब का फ़िगर था उसका। मेरे मन में कामवासना जागृत हो गई थी और मैं अब उसे चोदने की इच्छा मन में लाने लगा किंतु यह सब संभव नहीं लग रहा था।

मैंने उस रात निशा के बारे में सोच कर दो बार हस्तमैथुन भी किया और अगले दिन मैंने अपने मित्र को उसके बारे में बात की।

मेरे दोस्त ने बताया कि निशा का पति काफी अधिक शराब पीता है और अपनी पत्नी के साथ मारपीट भी करता है।

अब मेरे मन में निशा के प्रति लगाव सा हो गया था इसलिए दोपहर को मौका देख कर मैं उसके घर चला गया।

निशा मुझे देख कर कुछ चकित हुई लेकिन अपने आप को संभाल मुझे बैठक में बैठाया और पानी पिला कर चाय बनाने रसोई में चली गई।

कुछ देर के बाद वह चाय बना कर ले आई और मेरे सामने बैठ कर चाय प्याली में डाल कर मुझे परोस दी।

उसके हाथ से चाय लेते समय मेरा हाथ उसके हाथ को छू गया तब उसने झट से अपना हाथ खींच लिया और कुर्सी पर पीछे हो कर बैठ गई।

मैंने चाय पीते हुए उससे उसके पति के बारे मैं जब पूछा तो वह पहले तो झुंझलाई और फिर कहा- वे तो शाम को ही आएंगे शायद दारू पीकर।

जब मैंने उससे उसके पति का दारू पीने का कारण पूछा तो वह कहने लगी कि मैं क्या करूँगा उस बारे में कुछ भी जान कर।
वह तो उसके अभागी जीवन का एक कड़वा सत्य है और वह किसी से भी उस बारे में कोई बात नहीं करना चाहती।

क्योंकि वास्तव में मैं निशा से सिर्फ कुछ देर और बात करना चाहता था इसलिए मैंने उस से कह दिया कि अगर वह मुझ से बात करेगी तो शायद मैं उसके पति की दारु छुड़ाने में उसकी कुछ मदद कर सकूँ और उसके जीवन को सुखमय बना सकूँ।

मेरी बात सुन कर भी उसने अपने पति के बारे में मुझसे बात करने के लिए मना कर दिया।

फिर भी मैंने हिम्मत नहीं हारते हुए निशा पर बात करने के लिए थोड़ा दबाब डाला और उसे कहा कि अगर वह मुझे सब कुछ बता देगी तो शायद उसके पति की दारु छुड़ाने का कोई रास्ता मिल जाए।

मेरी यह दलील सुन कर निशा कुछ गंभीर हो गई और अंत मैं मुझसे बात करने के लिए राज़ी हो गई।

बातों ही बातों में निशा ने बताया कि उसके पति में कमी होने के कारण वह मुझे संतान का सुख नहीं दे सकता था। वह इस संताप से अत्यंत दुखी रहता था और इसीलिए दिनभर दारू पीता रहता था।

जब मैंने निशा से पूछा कि उसके पति ने इलाज़ क्यों नहीं करवाया, तब उसने बताया की उन्होंने बहुत से डॉक्टरों को भी दिखाया और अनेक परीक्षण भी करवाये लेकिन अभी तक कोई लाभ नहीं हुआ।

मैंने चाय समाप्त करने के बाद उससे कहा- अगर तुम बुरा ना मानो तो मैं तुम्हारी सहायता कर सकता हूँ।

मेरी बात सुन कर उसके चेहरे पर एक आशावादी चमक आ गई थी और उसने तुरंत पूछा- कैसे?

तब मैंने उससे ‘फिर कभी बाद में बताऊँगा’ कह कर वहाँ से चलने के लिए उठ खड़ा हुआ।

उसने झट से मेरा हाथ थाम लिया और मुझे खींच कर अपने पास सोफे पर बैठाते हुए बोली- पहले बताओ क्या सहायता कर सकते हो? फिर जाने दूँगी।

उसके छूने से मेरे पूर्ण शरीर में झनझनाहट पैदा हो गई और मेरा लिंग भी सचेत होने लगा।

मैंने सीधा मुद्दे पर आते हुए उससे कहा– अगर तुम संतान चाहती हो तो किसी और के साथ सम्भोग कर लो।

तब वो बोली– मैंने कई बार ऐसा सोचा था, किन्तु मेरे पति की नशे की हरकतों के कारण कोई भी व्यक्ति हमारे घर आना पसंद ही नहीं करता है।

तब मुझे ऐसा लगा कि जैसे मुझे मेरी मन मांगी मुराद मिल गई थी, मैंने उससे कहा– मैंने जब से तुम्हें देखा है, तब से ही मैं तुम पर फिदा हो गया हूँ। क्या तुम मेरे साथ संसर्ग करना चाहोगी? मैं तुम्हे वचन देता हूँ कि मैं तुम्हें अपने बीज से संतान ज़रूर दूंगा।

मेरे इस अंदाज में बोलने पर उसने पूछा- क्या सच में तुम मुझे एक संतान दे सकते हो?

और तरफ बड़ी उम्मीद से देखने लगी।

यह कहानी आप decodr.ru पर पढ़ रहे है ।

तब मैंने उससे कहा– हाँ, मैं तुम्हारी सहायता ज़रूर करूँगा।

और मैंने उसे अपने पास खींच कर उसके होंठ चूम लिए।

मेरी इस हरकत से वह थोडा घबरा गई और जब मुझसे छूटने कि कोशिश करने लगी, तब मैंने उसे छोड़ दिया तो वह तुरंत उठ कर गई और घर एवं कमरे का दरवाजा बंद कर दिया, फिर मेरे पास वापस आकर बैठते हुए बोली– दरवाजा खुला था, कोई भी आ सकता था।

यह सुनते ही मैंने उसे दोबारा अपने पास खीच कर सीने से लगा लिया और उसके होंठों को चूमने लगा। इस बार इस चुम्बन क्रिया में वह भी मेरा साथ दे रही थी और पांच मिनट तक हम एक दूसरे के होंठों को चूमते रहे।

यह कहानी आप decodr.ru पर पढ़ रहे हैं !

मुझे ऐसा लग रहा था जैसे की मैं जन्नत में हूँ और उत्तेजना से अब मेरा मेरा लिंग भी तन कर लोहे की छड़ जैसा हो गया था, मुझे अपने पर नियंत्रण रखने में परेशानी होने लगी थी इसलिए मैंने उसे गोद में उठा लिया और उसके बैडरूम में ले जाकर उसी के बिस्तर पर लिटा दिया।

निशा भी अब कुछ उत्तेजित हो चुकी थी और हम दोनों की साँसें भी तेज़ हो गई थी। काफी देर तक जब हम एक दूसरे को चूमते रहे तब मैंने उसकी चोली में हाथ डाल दिया और उसके उरोजों को दबा दिया।

निशा ने जब मेरी इस हरकत का कोई विरोध नहीं किया तब मैंने उसके कपड़ों के अन्दर हाथ डाल कर उसके उरोजों को मसलने लगा।
क्या चूचियाँ थी उसकी !
मैंने आज तक किसी भी औरत की इतनी सख्त, उठी हुई और बड़ी चूचियाँ नहीं देखी थी।

मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसकी चोली उतार दी और उसके चूचियों को चूसने लगा जिससे उसकी सांसें काफी तेज हो गई थी।

जब मैंने नीचे उसकी जाँघों के बीच में हाथ डाला तो उसने मेरा हाथ रोक दिया और कहने लगी- पहले अपने कपड़े तो उतारो।

जब मैंने उसे कहा कि वह मेरे कपड़े खुद ही उतार दे तब उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिये और दूसरी तरफ मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिये।

मैंने पहली बार सुन्दरता की मूरत जैसी कोई औरत को नग्न देखा जिससे मेरा लिंग तन कर खड़ा हो गया था।

निशा ने मेरे लिंग को देख कर उसे हाथ में ले लिया और कहने लगी कि उसके पति का लिंग तो मेरे लिंग से छोटा और पतला है।

तब मैंने उसे समझाया कि लिंग के छोटा या बड़ा होने से कोई फर्क नहीं पड़ता बल्कि लिंग के सख्त होना और अधिक देर खड़े रहना ही ज़रूरी है। संसर्ग करने के लिए मर्द में ताकत और स्टैमिना होना अधिक महत्वपूर्ण है।

मैं उसे बिस्तर पर लिटाते हुए उसकी योनि को ध्यान से देखने लगा तो पाया कि उसकी योनि बिल्कुल बालरहित और चिकनी थी।

मैं उसकी योनि को चूमने की इच्छा को रोक नहीं सका और मैंने झुक कर उसे जैसे ही चूमा वह एकदम से उहह… आह… करने लगी।

जब अगले दस मिनट तक मैं उसकी योनि को चूसता एवं चाटता रहा तब वो कहने लगी- अब और मत तड़फाओ, अब मैं बरदाश्त नहीं कर सकती इसलिए जल्दी से अपने लिंग को मेरी योनि के अंदर डाल दो।

मैं भी मौके की नजाकत को समझते हुए उसकी योनि में अपने लिंग को डालने की कोशिश करने लगा किन्तु वो अंदर नहीं जा रहा था क्योंकि उसकी योनि काफी कसी हुई थी।

मैंने उसे कहा कि वह लिंग को अपने मुख में लेकर थोड़ा चिकना कर दे तो उसने तुरंत मेरे लिंग को अपने मुख में लेकर उसे थूक से गीला कर दिया।

फिर मैंने थोड़ा ज़ोर लगा कर लिंग अंदर किया तो वह बहुत जोर से चीख उठी।

मैंने उससे पूछा- क्या ज्यादा दर्द हो रहा है?

तो उसने कहा- ऐसे दर्द में ही तो मजा है।

अभी तक मेरा सिर्फ मेरा लिंग मुंड ही उसकी योनि के अन्दर गया था इसलिए कि उसे कम तकलीफ हो मैंने धीरे धीरे धक्का लगा कर आधा लिंग योनि के अंदर कर दिया।

फिर एक मिनट रुक कर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखते हुए एक ज़ोर का धक्का मारा और पूरा लिंग योनि के अंदर धकेल दिया।

वह दर्द के मारे चीख उठी और पाँव पटक पटक कर छटपटाने लगी तथा उसकी आँखों से अश्रू भी निकल आये।

थोड़ी देर के लिए मैं उसी स्थिति में रुका रहा और जब वह कुछ सामान्य हो गई तब उसने मुझे हिलने के लिए संकेत दिया, तब मैंने धीरे धीरे धक्के मारने शुरू कर दिये।

कुछ समय के बाद वह भी उछल उछल कर मेरा साथ देने लगी और लगभग अगले दस मिनट तक हम दोनों वह क्रिया करते रहे।
फिर अकस्मात ही उसने जोर से सिसकारी ली और मुझसे चिपक गई तथा उसका शरीर अकड़ने लगा।

मैं समझ गया कि वह उत्तेजना के चरम शिखर पर पहुँच चुकी है और उसकी योनि में स्खलन होने वाला था।

तभी निशा की योनि में ज़बरदस्त सिकुड़न हुई जिससे मेरे लिंग को रगड़ लगी और उसके साथ ही मेरा भी वीर्य स्खलन हो गया।

दोनों के सांस फूल गई थी इसलिए कुछ देर तक तो हम उसी स्थिति में लेटे रहे और संसर्ग से मिले सुख, आनन्द तथा संतुष्टि की अनुभूति करते रहे।

जब निशा की सांस स्थिर हुई तब उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया और मेरा पूरा चेहरा तथा शरीर के अनेक अंगों को चूम चूम कर गीला कर दिया।

फिर उसने बताया कि उसे इतने वर्षों में कभी भी इतनी संतुष्टि नहीं मिली जितनी की मेरे साथ संसर्ग करते समय मिली।

उस दिन से लेकर अगले तीन दिनों तक मैंने उसके साथ सोलह बार संसर्ग किया और वह हर बार मुझ से पूर्ण रूप से संतुष्ट रही।

दोस्त की शादी हो जाने के बाद मैं वापस नोएडा आ गया और कुछ दिनो के बाद जब मैंने उस मित्र से उसके बारे में पूछा तो उसने बताया कि वह गर्भवती है।

मित्र से यह सूचना मिलने के बाद मेरे मन को भी पूर्ण संतुष्टि मिली कि मैंने निशा को दिए वचन को पूरा किया था।

आज वह मेरे द्वारा उसके गर्भ में डाले गए बीज से एक बच्चे की माँ बनी है और यह यथार्थ सिर्फ उसे और मुझे ही ज्ञात है।



"bade miya chote miya""sex stori hinde""indian chudai ki kahani""indian sex stores""sex story bhai bahan""sexcy hindi story""nude sexy story""office sex story""gay sex story""sex kahaniyan""xxx story in hindi""bhen ki chodai""sexy khaniya hindi me""free sex stories in hindi""chut story""www.hindi sex story"kamukta."hot hindi sex story""indian sex kahani""boob sucking stories""english sex kahani""behan ko choda""sex story""induan sex stories""mosi ki chudai""www new sexy story com""new sexy storis""sasur bahu chudai""hindi sex khanya""hindi sax story""kamukta com hindi kahani""hindi adult story""new hindi sex store""sex hot story in hindi""chut ki malish""sex kahani photo""indian sex storis"kamkuta"bahan ki chudai kahani""sex khani""adult sex kahani""chudai kahani maa""india sex stories""mausi ki chudai ki kahani hindi mai""anni sex stories""dudh wale ne choda""sex story new in hindi""bhabi sex story""desi sex stories""beti ko choda""indain sex stories""maa beta ki sex story""sagi bhabhi ki chudai""first time sex story""free sex story hindi""sexy story hindhi""free sex stories""www kamvasna com"xxnz"hindi sex story hindi me""hottest sex story""indain sex stories""kamukta com sex story""lesbian sex story""sex stories hot""rishton mein chudai""hindi sax storis""hindi lesbian sex stories""behen ko choda""naukrani ki chudai""devar bhabhi ki chudai""hindi erotic stories""hindi chudai photo""hindisex story""chudai ki story""wife sex story in hindi"antarvasna1"hindi chudai kahaniya""हॉट सेक्स"