रुचि का शिकार-1

(Ruchi Ka Shikar-1)

अभी तक आपने

रेखा- अतुल का माल-1

में पढ़ा कि कैसे सरीना ने मुझे अपने और रेखा के बदन के भरपूर मजे दिलाए।

अब आगे :

अगले दिन सरीना बारह बजे आ गई उसके साथ ऑटो करके मैं धारावी में उमा की खोली पर आ गया। उमा एक 50 साल की औरत थी। अंदर रुचि एक गरीबों जैसी साड़ी पहन कर बैठी थी। उमा चाय बना लाई।

सरीना ने बताया कि उमा इसे अपनी भतीजी बना कर लाई है।

रुचि मुझे देखकर शरमा रही थी।

उमा बोली- इतना क्यों शरमा रही हो? फ़ोन पर तो बात कर चुकी हो ! तुम्हारा पुराना यार है। लो चाय पियो !

रुचि मुझे देखकर अब भी शरमा रही थी, हम चार लोग ही कमरे में थे।

उमा रुचि की तरफ देखते हुए सरीना से बोली- बहुत शरमा रही है, कल 12 बजे से पहले नहीं छोडूंगी तेरी चूत की भोंसड़ी बनवानी है, थोड़ी देर और शरमा ले।

उमा बोली- सरीना, यह बहुत शर्मीली है, इसे सबके सामने नंगा करवाऊँगी और चुदवाऊँगी, नहीं तो कुतिया स्मार्ट नहीं बन पाएगी।

रुचि शरमाते हुए मुस्कुरा रही थी।

उमा बोली- राजीव, इसकी चूत का भोंसड़ा आपको बनाना है, ठण्डे क्यों पड़े हो? इसके भोंपू बजाओ और साली को नंगी करो ! कुतिया को गर्म करो, नहीं तो यह शर्म-शर्म में ही दिन निकाल देगी। इसे सीधा मत समझना, शरीफ औरतों के लबादे में रण्डी है, नखरे कर रही है। मैंने साली हज़ार से ज्यादा लड़कियों को धंधे पर बिठाया है, दूर से देखकर ही समझ जाती हूँ कि किसकी चूत में कितनी खुजली हो रही है। यह लो पान खाओ और इसे बजाओ ! बगल में लुंगी पड़ी है, बांध लेना।

उमा ने पान मेरी तरफ बढ़ा दिया और खुद भी एक खा लिया, उमा बोली- तुम लोग मज़े करो, मैं सरीना को जरा शाकाल साहब के यहाँ छोड़ कर आती हूँ। शाकाल साहब के यहाँ चार बजे से धंधा चलता है, मुंबई के सेठ आते हैं लड़कियों को बजाने ! यह रात को यहाँ क्या करेगी, अभी तो जवान है साली दस-बारह हज़ार कमा लेगी। अभी तीन बज़ रहे हैं, छः बजे आ जाऊँगी। बाहर से ताला लगा कर जा रही हूँ, जरुरत पड़े तो मोबाइल बजा लेना। रुचि रानी छः बजे तक बज लेना और भगोने में दूध रखा है, तुम दोनों गर्म करके पी लेना। रात को शाकाल के अड्डे पर पहुँचा दूँगी, वहाँ पर इज्ज़त लुटवाने के मज़े लेना और रण्डी बनकर नाचना ! चुदाई की गुरु बन जाएगी तू !

उमा ने रुचि की पप्पी ली और मुस्कुरा कर सरीना को साथ लेकर बाहर चली गई।

उमा के जाने के बाद रुचि को मैंने अपनी गोद में खींच लिया और उसके होंठों में होंठ डाल कर चूसने लगा। कुछ देर बाद मैंने जब होंठ हटाये तो रुचि बोली- आप से प्यार करने का मन मुझे बहुत दिनों से कर रहा है !

मैंने उसके ब्लाउज के अंदर हाथ डाल दिया, उसकी चूचियाँ बड़ी-बड़ी थीं। रुचि ने ब्लाउज के बटन खोल कर ब्लाउज उतार दिया, वह ब्रा नहीं पहने थी, उसकी दूधिया चूचियाँ बाहर निकल आईं। रुचि की चूचियाँ किसी को भी पागल करने में समर्थ थीं, गोल-गोल, बड़ी-बड़ी और सामने को तनी हुई थीं। सच, अगर इतनी सुन्दर चूचियाँ देखकर भी किसी का लण्ड खड़ा न हो तो उसे डॉक्टर की जरूरत होगी। मैं एकटक रुचि की चूचियाँ देखने लगा।

रुचि बोली- दबाइए न ! बहुत मन कर रहा है।

यह मेरी खुशकिस्मती थी कि आज रुचि की चूत और चूचियों से मुझे खेलना था। रुचि को मैंने चारपाई पर लिटा दिया और उसकी चूचियों का मर्दन करने लगा।

रुचि गर्म हो गई, उसने मेरा मुँह अपनी चूची की घुण्डी पर लगा दिया। अब मैं एक चूची चूस रहा था और एक का चुचूक मसल रहा था। मेरा लण्ड पैंट में पूरा तना हुआ था। रुचि थोड़ी देर में बहुत गर्म हो गई और आहें भरती हुई बोली- कुछ करो ! मेरी चूत में डालो ! अब नहीं रहा जा रहा है ! चुदने का बहुत मन कर रहा है।

रुचि के पेटीकोट का नाड़ा मैंने ढीला किया और उसे नीचे सरका कर उतार दिया। रुचि की चिकनी चमचमाती ऊपर की तरफ फूली हुई चूत मेरी आँखों के सामने थी। चूत काम-अग्नि के मारे चूत-रस छोड़ रही थी।

रुचि शरमा गई और बोली- ऊहं आपने तो मुझे नंगा कर दिया?

और उसने अपनी टांगें एक-दूसरे से चिपका कर चूत छिपा ली। मैंने अपनी पैंट-शर्ट उतार दी, मेरा लम्बा और मोटा लण्ड चड्डी से बाहर निकल रहा था। मैंने बिना देर किये अपनी चड्डी उतार दी। मेरा लम्बा लण्ड अब रुचि की आँखों के सामने था।

रुचि अपने मुँह पर हाथ रखते हुआ बोली- ऊहं… इतना लम्बा?

मैंने उसके मुँह के आगे लौड़ा रख दिया और बोला- लो इसे चूस कर देखो !

रुचि बोली- छिः छिः मैं नहीं चूसती।

मैंने कहा- अच्छा, जैसी तेरी मर्ज़ी !

और मैंने उसकी दोनों चूचियों को दबाते हुए उनके बीच में अपना लण्ड फंसा दिया और उसकी चूचियों में दस-बारह धक्के पेल दिए।

रुचि बोली- ऊंह ! यह चारपाई चुभ रही है, जमीन पर लिट कर चोदो मुझे !

रुचि को गोद में उठाकर मैंने जमीन पर पड़े मैले से गद्दे पर लिटा दिया और उसकी चूत चूसने लगा। चूत-रस का मैं शौकीन हूँ, मेरा लण्ड कड़क होता जा रहा था। रुचि गर्म हो गई थी, उसकी चूत लण्ड खाने को बेताब हो रही थी, रुचि बोली- अब डालो ना ! बहुत खुजली हो रही है राजीव ! अब चोद दो ! अपना लण्ड घुसाओ ! बड़ा मन कर रहा है, अब रहा नहीं जा रहा है, जल्दी चोदो मेरे प्यारे राजा !

रुचि की चूत पर मैंने अपना लण्ड छुला दिया और लण्ड का मुँह उसकी चूत की दरार पर फिराने लगा। उसकी ऊह आह से कमरा गूंजने लगा, रुचि आह ऊह करती हुई चिल्ला रही थी- ,भाई साहब, अंदर डालिए ! चोदिये ना ! अब रहा नहीं जा रहा है !

मैंने लण्ड चूत में सरका दिया। लण्ड फिसलता हुआ आराम से चूत में घुस गया। रुचि ने मुझे कस कर भींच लिया और बोली- आह आह ! बड़ा मज़ा आया ! चोदो और चोदो ! मेरी फाड़ डालो ! वाह, मज़ा आ गया ! जल्दी धक्के मारो राजा !

मैंने रुचि को चोदना शुरू कर दिया, इस बीच कभी उसकी चूचियों को निचोड़ा और कभी चुचूकों पर धीरे धीरे काटा। मेरे धक्के उसकी चूत पर चोट कर रहे थे। आज मेरी पुरानी पड़ोसन चुद रही थी।

कुछ देर बाद मैंने लण्ड निकाल लिया और पूछा- अब चूसोगी इसे?

रुचि बोली- नहीं, मैं चूसूंगी नहीं ! मुझे और चोदो ना ! अभी तो यह पूरा तना हुआ है ! इसका रस मेरी चूत में डालो ! मैंने गोली खा रखी है, डरो नहीं !

रुचि को मैंने उल्टा किया और उसकी चूत में पीछे से लण्ड पेल दिया और रुचि को अपने बदन से दबाकर उसकी पीछे से चूत चोदने लगा।रुचि ऊह आह कर रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने उसकी चूत लण्ड-रस से भर दी, रुचि सीधे होकर मुझसे चिपक गई और बोली- सच राजीव, इतना मज़ा कभी चुदने में नहीं आया ! तुमने तो एक घंटे मेरी चूत में अपना लण्ड घुसा कर रखा। सच तुम तो वाकई मर्द हो ! मेरा आदमी तो दस मिनट में ही खाली हो जाता है।

मैंने रुचि को हटाते हुए कहा- चलो, एक एक ग्लास दूध पीते हैं, फिर दुबारा चोदता हूँ।

रुचि ने दूध गर्म किया और हमने एक एक ग्लास गरम दूध पिया।

कहानी जारी रहेगी।


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