शुरुआत अच्छी रही

(Shuruat Achchhi Rahi)

हेलो दोस्तो मेरा नाम मनीष है ओर मैं गाज़ियाबाद का रहने वाला हूँ, इस वक़्त मेरी उम्र 26 वर्ष है।

यह कहानी मेरी और मेरी एक्स गर्लफ्रेंड की है, यह तीन वर्ष पहले घटित हुई थी, शायद मेरे कुछ दोस्त इस कहानी को सच ना मानें लेकिन सच मानना या झूठ मानना वो तो आपके ऊपर है, मेरा काम है लिखना तो मैं लिख रहा हूँ, अगर कोई ग़लती हो जाए तो माफ़ कर देना दोस्तो !

धीरे धीरे बात आगे बढ़ने लगी, इंटरनेट पर ही मैंने उसकी काफ़ी सारी फोटो देखी, जिनमें वो एकदम माल लग रही थी। टॉप के ऊपर से ही उसकी गोल गोल चूचियाँ देख कर ऐसा लग रहा था कि बस मसल कर रख दूँ इन्हें, खा जाऊँ चबा चबा कर दोनों निपल्स को !

ऐसे ही दिन बीतते गये, फिर एक दिन मैंने उसे प्रोपोज कर दिया और उसने भी हाँ कर दी, फिर क्या नंबर एक्सचेंज और घंटों तक बातें चालू, जैसे : खाना खाया या नहीं खाया और खाया तो क्या खाया, फिर सोते वक्त- मेरे पास आ जाओ, चिपक जाओ, होंटों को होंटों में डाल लो और करते करते फिर बात चूत लंड पे आ जाती और फोन पर ही चुदाई शुरू !

इधर से मैं बोलता- जान मेरा नाम लेकर अपनी चूत में उंगली डालो ना !

उधर से वो बोलती- जान डाल तो रही हूँ ना, तुम भी तो मेरा नाम लेकर अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से मसलो ना और सारा पानी मेरी प्यासी चूत में डाल दो ना शोना !

अच्छा मेरे जो भी दोस्त फोन सेक्स करते होंगे उन्हें ज़रूर पता होगा कि इसमें कितना मज़ा आता है, हर चीज़ का एक अलग ही मज़ा है, फिर चाहे वो असली चुदाई हो या फिर फोन सेक्स या फिर साइबर सेक्स हो, और तो और मूठ मारने का भी एक अलग ही मज़ा है यारो !

खैर ऐसे ही कुछ दिन बीत गये, फिर हमने एक रविवार में मिलने का प्रोग्राम बनाया और हम गाज़ियाबाद के एम एम एक्स मॉल में मिले।

और फिर जब उससे पहली बार मिला तो उसे देखता ही रह गया, फोटो से कहीं ज़्यादा मस्त माल थी वो ! ये बड़ी बड़ी चूचियाँ और पतली सी कमर, एकदम गुलाब से गुलाबी होंट ! देखते ही चूसने का मन करने लगा लेकिन सार्वजनिक स्थान था तो खुद पर काबू करना पड़ा।

मिलने के बाद हमने मूवी देखने का फ़ैसला किया, तो मैं जाकर ‘आई हेट लव स्टोरी’ के दो कॉर्नर की टिकट ले आया, उस समय बुद्धि ने भी काम नहीं किया कि आज इतवार है और ऊपर से नई मूवी, साली भीड़ तो होनी ही थी।

तो वही हुआ हाउसफुल !

जैसे तैसे जाकर बैठ गये और कुछ देर ऐसे ही बैठे रहे और एक दूसरे की तरफ देखते रहे। फिर मैंने ही शुरुआत की और उसका हाथ अपने हाथ में लेकर सहलाने लगा और फिर बगल से हाथ डाल कर चूचियाँ मसलने लगा, भीड़ ज़्यादा थी तो वो मना कर रही थी लेकिन साली यहाँ तो लंड में आग लगी हुई थी, जितना भी हो सका तो मैंने उसे मसला, चूसा,उसकी पतली पतली जाँघों पर अपनी उंगलियाँ फिराई, यही सब करते करते पता ही नहीं चला कि इतना समय बीत गया, मूवी ही ख़त्म हो गई।

मूड सही होने की जगह और खराब हो गया, लंड का तो इतना बुरा हाल था कि बता नहीं सकता, समझ नहीं आ रहा था कि करूँ तो क्या करूँ !

फिर मेरे दिमाग में आया कि एक मूवी और देखी जाए, मैंने उसे बोला तो वो मना करने लगी कि लेट हो जाएगी।

जैसे तैसे करके मैंने उसे मना लिया और इस बार अक्ल से काम लेते हुए एक हॉलीवुड मूवी की टिकट ले आया।

जो मेरे दोस्त एम एम एक्स मॉल के बारे में जानते हैं वो शायद अब इस होने वाली घटना का यकीन ना करें क्योंकि यह मॉल सुरक्षा के मामले में बहुत ज़्यादा सख़्त है।

हम अपनी सीट पर जाकर बैठ गये, इस बार नसीब इतना अच्छा कि पूरे हॉल में कुछ ही लोग थे जिनमें ज़्यादातर जोड़े ही थे, इस पर सोने पे सुहागा यह हुआ कि हमारी सीट भी सबसे आख़िरी लाइन की कॉर्नर की थी और पूरी लाइन में हमारे अलावा कोई भी नहीं थाI

बस फिर क्या बैठते ही टूट पड़ा उस पर, उसका चेहरा अपने दोनों हाथों में लेकर उसके गुलाबी होंटों को चूसना शुरू किया, उसने भी मेरा साथ दिया और बेसबरों की तरह एक दूसरे के होंट चूसने लगे।

क्या बताऊँ दोस्तो कि कितना मज़ा आ रहा था ! फिर उसके होंट चूसते चूसते मैंने उसकी गोल गोल चूचियाँ पकड़ ली और धीरे धीरे उन्हें दबाने लगा। लंड तो बस फटने को तैयार था, और कुछ ऐसा ही हाल उसका भी था।

फिर उसका एक हाथ पकड़ कर मैंने अपने लंड पर रख दिया। पहले तो वो थोड़ा शर्मा रही थी लेकिन जब मैंने उसकी गैगी के ऊपर से उसकी चूत को दबा दिया तो उसने भी मेरा लंड मसल डाला।

दोस्तो यह लैगी बड़ी मस्त चीज़ होती है, वो आगे पता चलेगा कि कैसे !

उसके बाद तो बस जैसे आग से शरीर ही जलने लगा, मैंने अपने एक हाथ उसके कुर्ते के अंदर डाला और उसकी नंगी चूची को पकड़ लिया और दाने को पकड़ के मसल डाला। वो तो जैसे पागल ही हो गई। फिर मैंने उसकी चूची को बाहर निकाला और बस बुरी तरह से चूसने लगा, खाने लगा, वो बुरी तरह सिसकियाँ निकाल रही थी, उफ्फ़ आआहह !

और बोल रही थी- जानू, और चूसो इन्हें !

और मेरे बालों को ज़ोर से पकड़ कर मेरा मुँह अपनी चूचियों पर दबा रही थी।

चूचियाँ चूसते चूसते मैंने अपना एक हाथ उसकी लैगी के ऊपर से उसकी चूत पर रख दिया जो एकदम गीली हुई पड़ी थी और फिर धीरे धीरे उसकी चूत को मसलने लगा, हम दोनो ही अपने होश में नहीं थे, इतना मज़ा आ रहा था कि मैं बयान नहीं कर सकता।

फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी लैगी के अंदर घुसा दिया और फिर पेंटी के अंदर, इतनी गरम चूत पर हाथ लगा कर तो ऐसा लगा कि कहीं मेरा हाथ ही ना जल जाए ! ऊपर से इतना पानी और छोटी छोटी झांट, बस उंगली अंदर जाने में देर नहीं लगी।

मैंने अन्तर्वासना पर सभी कहानियाँ पढ़ी हैं, उनमें से ज़्यादातर कहानियों में लड़की की चूत को कुछ ज़्यादा ही टाइट और लड़के के लंडों को कुछ ज़्यादा ही लंबा ओर मोटा बताया जाता है, असल जिंदगी से तो हम सभी वाकिफ़ हैं दोस्तो ! तो फिर ये सब क्यूँ?

मैं समझता हूँ कि आज के समय में अगर लड़की 18-20 साल की है तो चाहे उसकी सील ना टूटी हो लेकिन तब भी उसकी चूत इतना तो खुल ही जाती है कि एक या दो उंगली आराम से चली जाए, क्योंकि सिर्फ़ हमारा ही मन हस्तमैथुन करने को नहीं करता, लड़कियों का भी करता है और शायद हमसे ज़्यादा ही ! हजारों कहानियाँ हैं decodr.ru पर !

चलो अब अपनी कहानी पे वापस आता हूँ, बस मैं उसकी चूची चूसने लगा और साथ साथ उसकी चूत में उंगली करने लगा और वो मेरा लंड सहलाने लगी।

इसी सब में इंटरवेल हो गया और हम अपनी अपनी सीट पर ठीक से बैठ गये। मैंने उसे बोला- कुछ खाने के लिए लेकर आता हूँ !

और बाहर आ गया। तभी मेरे दिमाग़ में एक विचार आया, मैंने दो अलग अलग फ्लेवर की पेस्ट्री ले ली और साथ में कोल्ड ड्रिंक ! इंटरवेल ख़त्म हुआ तो फिर से अंधेरा हो गया, उसे गर्म करने के लिए मैंने फिर से वही सब शुरू किया, पहले होंट फिर स्तन और फिर चूत को मसलना !

उसके बाद मैंने उसका कुर्ता नीचे से ऊपर को उठा कर दोनों चूचियों को बाहर निकाला और धीरे धीरे मसलने लगा, फिर चूसने लगा।

इसके बाद मैंने एक पेस्ट्री उठाई ओर उस पर से उंगली से थोड़ी सी क्रीम लेकर उसकी दोनों चूचियों पर लगाई, ख़ास तौर पर उसके निप्पलों पर, फिर उसके निप्पल चाटने लगा और अपने दांतों से काटने लगा। वो तो बस पागल सी हुई जा रही थी, काफ़ी देर तक मैं यही करता रहा और फिर अपना लंड पैंट से बाहर निकाल कर उसके हाथ में दे दिया, वो मसलने लगी और मेरी मूठ मारने लगी।

फिर मैंने उसे लंड को मुँह में लेने को कहा तो उसने मना कर दिया लेकिन मैं लगातार उसकी चूत मसल रहा था, उसे ज़्यादा गरम कर रहा था। काफ़ी कहने पर वो तैयार हुई और मैंने थोड़ी सी पेस्ट्री की क्रीम अपने लंड के अग्र भाग पर लगा दी और उसे चाटने के लिए बोला।

थोड़े नखरे करने के बाद वो उसे चाटने लगी, पहले तो बस चूम रही थी लेकिन जैसे ही उसे पेस्ट्री का टेस्ट मिला, वो उसे चूसने लगी और मेरा हाल बुरा होने लगा, ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं उसके मुँह में ही छुट ना जाऊँ ! धीरे धीरे मैं उसके मुँह में ही धक्के मारने लगा। बस 2-3 मिनट में ही उसने लंड मुँह से बाहर निकाल दिया लेकिन तब तक हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि उसे बस चुदाई से ही ठीक किया जा सकता था।

फिर मैंने उसे उसकी लैगी नीचे करने के लिए बोला, और उससे सीट के आगे जो थोड़ी सी जगह होती है, वहाँ झुक कर घोड़ी की तरह से होने को कहा।

दोस्तो लैगी में इलास्टिक होती है तो उसे नीचे करने में कोई परेशानी नहीं होती, बस यही फायेदा होता है लैगी में, जबकि जीन्स और सलवार में ऐसा नहीं होता, फिर उसने अपनी लैगी ओर पेंटी नीचे कर ली और कुतिया की तरह नीचे को झुक गई।

पहले तो मैंने अपने आपको और उसको ठीक से अवस्थित किया, फिर उसकी चूत को खूब मसला और 1-2 बार चाटा भी, बड़ा अजीबसा स्वाद लगा, फिर अपने लंड को उसकी गरम चूत पर खूब रगड़ा, फिर उसके पैरों को थोड़े से फ़ैला कर लंड चूत के छेद पर लगा कर आराम से अंदर को सरका दिया।

उसको थोड़ा सा दर्द हुआ लेकिन उस समय चुदाई का भूत सवार था, इतना भी होश नहीं था कि कहाँ है हम !

लंड 1-2 इंच अंदर गया होगा, मैं उसी में ही धक्के लगाने लगा और फिर जब बरदाश नहीं हुआ तो एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया जिससे उसकी ज़ोरदार चीख निकल गई। लेकिन सभी अपने अपने काम में व्यस्त थे तो किसी को किसी की क्या परवाह !

अंधेरे में कुछ पता तो चल नहीं रहा था तो बस धक्के लगने शुरू और उसके उरोज पकड़ कर धक्के पे धक्के !

उसकी सिसकारियाँ निकले जा रही थी और अपने कूल्हे पीछे कर कर के लंड पूरा अपनी चूत की गहराइयों में उतरवा रही थी, उसकी चूत के पानी और खून (जो बाद में देखा था) के कारण लंड भी चूत में सटा सट चल रहा था और उसकी ‘आ उ उ ओह आह’ की आवाज़ें निरंतर आ रही थी।

कुछ देर के बाद उसने अपनी चूत एकदम सिकौड़ ली और अपना गर्म गर्म पानी निकालने लगी। तभी कोई 15-20 धक्कों के बाद मैं भी झड़ने के करीब आ गया, लंड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया और हांफते हुए आगे वाली सीट के पीछे अपना कीमती पानी गिरा दिया, फिर अपनी सांसों को समेटने लगा।

उसके बाद हम दोनों अपनी अपनी सीट पर कुछ देर के लिए आराम से बैठ गये और अपने आप को ठीक करने लगे। फिर जब तक मूवी ख़त्म हुई, तब तक एक दूसरे के अंगों के साथ खेलते रहे।

तो दोस्तो, यह थी मेरी सेक्स की शुरुआत उस लड़की के साथ !

फिर करीब दो साल तक हम दोनों रिलेशनशिप में रहे और हमने दबा के सेक्स के मज़े लूटे। आज भी यह कहानी लिखते वक़्त उसकी याद में लंड खड़ा हो गया, लगता है अब मूठ मारनी ही पड़ेगी।

इस सत्यकथा पर अपने कीमती विचार मेरे ईमेल पर भेजिए।

इस तरह की कई घटनाएँ मेरी जिंदगी में घटित हुई हैं और अगर साथ रहा तो उन्हें भी आपके समक्ष ज़रूर प्रस्तुत करूँगा।

मनीष


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