भाभी की जीरो चुदाई पार्टी

(Bhabhi Ki Zero Chudayi Party)

आपने मेरी पिछली दो कहानियाँ ‘गेहूँ की सिंचाई’ और ‘गेहूँ की सिंचाई का फल’
पढ़ी और सराहा, उसके लिए बहुत-2 धन्यवाद।

आपने पिछली कहानियों में पढ़ा कि सिंचाई के दौरान ट्यूबवेल मालिक वर्मा ताऊ की बहू को मैंने खूब चोदा जिसका फल यह मिला कि भाभी की माहवारी बंद हो गई जिसकी चिंता भाभी और मुझे दोनों को हुई।

इस परेशानी से बचने के लिए मैंने दूसरी मुलाकात में भाभी को एक तरकीब बताई।
अब आगे…

भाभी ने पी-टेस्ट से जाँच की जिसका परिणाम पाजिटिव आया जिससे भाभी की चिंता बढ़ गई। भाभी तो गर्भपात कराना चाहती थी लेकिन चूँकि भाभी का यह पहला बच्चा था इसलिए मैंने भाभी को दूसरा रास्ता सुझाया जिसके अनुसार भाभी ने भैया को फोन करके घर बुलाया जो दिल्ली में रहते थे।

भैया 4-5 दिन बाद आ गए और तीन दिन तक रहे।

इन तीन दिनों में भाभी की कई बार चुदाई हुई। तीन दिन बाद भैया चले गए। अब भाभी निश्चिँत हो गई थी कि अब बच्चा किसका है यह चिंता खत्म।

भैया के जाने के बाद भाभी ने मुझे फोन किया और बोली- चक्रेश, तुम्हारी बताई तरकीब काम कर गई। तुम्हारे भैया आए थे अभी कल ही वापस गए हैं।

‘तो कितनी बार चुदाई हुई?’ मैंने पूछा।

‘बड़े बेशरम हो, कोई गिनता है क्या?’ भाभी तुनककर बोली।

‘अरे यार, खफा क्यों होती हो? मेरा मतलब था कि काम हुआ या नहीं?’ मैंने कहा।

भाभी थोड़ा शरमाई और बोली ‘हाँ !’

मैंने कहा- यार, अब तो तुम्हारा काम हो गया पार्टी तो दे दो !

‘ले लो !’ भाभी ने कहा।

मैंने पूछा- बताओ फिर कब मिल रही हो?

भाभी बोली- आज रात में मेरे घर आ जाओ।

‘घर बुलाकर पिटवाओगी क्या?’ मैंने कहा।

‘अरे यार डरते क्यों हो? मैं पीछे वाला दरवाजा खोल दूँगी आ जाना !’ भाभी बोली।

मैंने कहा- घर में तुम्हारी सास भी तो रहती है, उसे अगर पता चल गया तो मेरी शामत आ जाएगी।

‘नहीं यार, वो तो मेरे ससुर जी के कमरे में ही सोती है, वो नहीं आएगी, अगर रात में जग भी गई तो तुम्हे पीछे वाले दरवाजे से
निकाल दूँगी, चिंता मत करो।’ भाभी ने कहा।

‘तो कितने बजे आऊँ?’ मैंने पूछा।

’11बजे के लगभग आना, वैसे जब सब लोग सो जाएँगे तो मैं मैसेज कर दूँगी, आ जाना !’ भाभी ने कहा।

मैंने कहा- ठीक है, जब रात का खाना हो जाए तो मैसेज कर देना, मैं घर से निकल पड़ूँगा।

‘ओके बाय !’ भाभी ने कहा और फोन रख दिया।

मैंने सोचा कि इतनी रात को किसी के घर जाना क्या ठीक रहेगा? फिर सोचा चलो जो होगा देखा जाएगा…

मेरे गाँव के बगल में 10 जनवरी को एक मेला लगता है और रात में नौटंकी भी होती है। वैसे मैं नौटंकी तो पसंद नहीं करता लेकिन
गाँव के दोस्तों के साथ खाना खाकर चला गया और भाभी के मैसेज का इंतजार करने लगा।

लगभग साढ़े दस बजे मैसेज आया, मैंने रिप्लाई किया और दोस्तों की नजर बचाकर भाभी से मिलने निकल पड़ा।

भाभी के घर के पास पहुँचा ही था कि अचानक कुत्ते जोर से भौंकने लगे। मैं थोड़ा पीछे आया और भाभी को मैसेज किया, भाभी ने
तुरंत जवाब में लिखा कि पीछे का दरवाजा खुला है आ जाओ।

मैं दरवाजे के पास गया और धीरे से दरवाजे को अंदर की ओर धकेला। दरवाजा बिना किसी आवाज के खुल गया। अंदर भाभी खड़ी थी
उन्होंने इशारे से मुझे अंदर बुलाया। मैं अंदर चला गया और भाभी ने आहिस्ता से दरवाजा बंद कर लिया।

भाभी मुझे अपने कमरे में ले गई, वहाँ दो बिस्तर लगे थे। एक खाली था और एक पर कोई लेटा था। मैंने भाभी से पूछा ‘ये कौन है?’

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‘हमारे पड़ोस की गीता है जिसके बारे में मैंने बताया था।’ भाभी ने बताया।

मैंने पूछा ‘किसी से कुछ बताएगी तो नहीं?’

‘नही यार, मैंने बात कर ली है, चिंता की कोई बात नहीं।’ भाभी ने कहा और मुझे चारपाई पर बैठाया।

भाभी ने पूछा- चाय बनाऊँ?

‘नहीं यार, उसकी कोई जरूरत नहीं है, बस तुम आ जाओ।’ कहते हुए भाभी को अपनी ओर खींचा।

भाभी आकर मेरी बगल में बैठ गई और खुद के साथ मुझे भी रजाई ओढ़ाई।

मैं लेट गया और भाभी को भी लेटाया। भाभी की पीठ पर हाथ रखकर मैंने अपनी ओर खींचा, भाभी मुझसे लिपट गई।

रजाई के अंदर हम एक-दूसरे के अंगों से खेल रहे थे, हमारी साँसें तेज होने लगी। मैं भाभी के होठों को अपने मुँह में लेकर चूस रहा था,

एक हाथ से मैं भाभी की छाती मसल रहा था और दूसरे हाथ से उनकी चूत सहला रहा था। बीच-2 में भाभी काँप जाती और जोर से लिपट जाती। हमारी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी।

अब मैं भाभी की चूत की तरफ अपना मुँह ले गया और लंड भाभी के मुँह की तरफ किया। भाभी मेरे अंडकोष चाट रही थी और मैं चूत में जीभ घुसाकर हिला रहा था। अचानक भाभी का शरीर एँठा और जोर की आवाज ‘ओऽऽह… मर गईऽऽ…’ के साथ चूत से पानी छोड़ दिया। भाभी मेरा लंड इतने जोर से चूस रही थी कि मुझे लगा कि पानी निकल जाएगा।

बाहर घना कोहरा पड़ रहा था, सर्दी अपने चरम पर थी लेकिन रजाई के भीतर जून की गर्मी थी। यह कहानी आप decodr.ru पर पढ़ रहे हैं।

जब मुझसे बर्दाश्त नही हुआ तो मैंने घूम कर अपना लंड एक ही झटके में भाभी की चूत में डाल दिया। अचानक हमले से भाभी के मुँह से सिसकारी निकल गई। मैंने हचाहच चुदाई चालू कर दी। भाभी के मुँह से ‘आ…आ…ऊँऽ…हाऽऽय…’ की आवाजें निकल रही थी।

करीब 10 मिनट बाद भाभी एँठने लगी और हाऽऽय की आवाज के साथ झड़ गई और मुझे पैरों से लपेट लिया।

पानी निकलने से चूत चिकनी होकर ढीली हो गई थी। अब मेरी नियत भाभी के जीरो मतलब पीछे के छेद पर खराब हो रही थी। मैं हाथ नीचे ले जा कर भाभी की अनछुई गाण्ड को सहलाने लगा।

भाभी ने पूछा- क्या कर रहे हो?

‘यार एक बार इसमें भी डाल लेने दो !’ मैंने प्यार से कहा।

‘नहीं यह ठीक नहीं है, मुझे बड़ा दर्द होगा !’ भाभी ने कहा।

‘नहीं यार, मैं आराम से करूँगा, दर्द नहीं होने दूँगा।’ मैंने मनाने की कोशिश की।

काफी न नुकर के बाद भाभी मानी, मैं वैसलीन की डिबिया साथ लाया था, निकाली और अपने लंड की नोक पर लगाई और भाभी के पीछे की जीरो पर लगाया, भाभी को घोड़ी बनाकर गाण्ड पर लंड का दबाव डालने लगा। चिकनाई की वजह लंड बार-2 स्लिप हो रहा था।

‘प्लीज यार, धीरे से डालना !’ भाभी ने निवेदन किया।

जवाब में मैंने भाभी को किस किया, गाण्ड के छेद पर लंड को टिकाया और एक धक्का दिया।

‘हाय रेऽऽ !’ भाभी के मुँह से निकला।

लंड का सुपारा गाँड़ में घुस चुका था।

भाभी चिल्लाने लगी- अरेऽऽ मर गईऽऽ जल्दी निकालो !

मैंने कहा- थोड़ा रुको मेरी जाऽन… अभी ठीक हो जाएगा।

मेरा सुपारा भाभी की कसी गाण्ड में फंसा था, मैं भाभी की छातियाँ मसल रहा था और दूसरे हाथ से चूत में उँगली से हरकत कर रहा था। कुछ देर बाद भाभी का दर्द उत्तेजना में बदल गया वो सिसकारियाँ लेने लगी। मैंने लंड को गाण्ड के भीतर ठेलना शुरु किया। क्या कसी जीरो थी भाभी की ! मुझे तो जन्नत के नजारे हो रहे थे। मैं बराबर चूत में उँगली से हरकत दे रहा था और गाण्ड मारने की गति को बढ़ाता जा रहा था। भाभी भी पूरा मजा ले रही थी। गाण्ड अत्यधिक कसी होने के कारण मैं ज्यादा नही टिक पाया और करीब 5-7 मिनट में ही मेरा पानी छूट गया।

मैंने भाभी को कमर से पकड़कर भींच लिया, उधर भाभी की चूत से भी पानी छूट गया जिससे मेरा हाथ भीग गया।

कुछ देर तक हम वैसे ही रजाई में पड़े रहे। हमें जीरो का पूरा मजा मिला था।

फिर मैं उठा शाल ओढ़ा और जाने लगा, भाभी मुझे दरवाजे तक छोड़ने आई। मैंने भाभी को जोरदार किस किया तो भाभी भी जवाबी किस देने लगी। एक बार मैंने भाभी के मम्मे दबाए और चल दिया।

भाभी के घर से बाहर निकला तो बाहर घना कोहरा पड़ रहा था। मैं जब भाभी की चुदाई कर रहा था तब मैंने नोट किया था कि बगल की चारपाई पर लेटी वो लड़की गीता बार-2 करवट बदल रही थी।

कुछ दिन बाद भाभी के मोबाइल से गीता का फोन आया और…

दोस्तों गीता की कहानी फिर कभी ! अभी दीजिए इजाजत और मेरी कहानी के बारे में अपकी शिकायत, राय आदि ईमेल से देते रहें ताकि अगली कहानियाँ बेहतर तरीके से लिख सकूँ।



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