लम्बे इन्तजार के बाद मिलन के क्षण

(Lambe Intjar Ke Baad Milan Ke Pal)

चार महीने हो चुके, आज मिलने की घड़ी आने वाली है; शाम को 8 बजे घर पहुँच जाऊँगा। घर वालों से मिलने के अलावा इस बात की ज्यादा ख़ुशी है कि शादी के बाद पहली बार घर जा रहा हूँ।
घड़ी में 8.15 हो रहे हैं।

घर के अंदर जैसे ही कदम रखा, सब घर वाले आ गए मिलने, पर मेरी नजरें जिसे खोज रही थी वो तो दिखाई नहीं पड़ रही।
खाना खाया, सब से बातें की, तभी मेरी नजरें रसोई की तरफ गयी, देखा तो कोने में खड़ी वो मेरी तरफ ही देख रही है।
नजरें मिली, उसने शर्मा कर नजरें झुका ली; मैं एकटक उसी की तरफ देखता रहा; वापस नजरें मिली तो उसने पहले तो गुस्से से देखा, फिर कुछ उलाहना सी देती नजर आई और फिर जल्दी से ऊपर अपने कमरे में आकर मिलने की याचना।

5 मिनट बाद वो ऊपर कमरे में चली गयी। अब नीचे मुझसे एक एक मिनट काटना मुश्किल हो रहा था।
फिर जब सबने बोला की थका हुआ होगा, जाकर आराम कर ले, तो दौड़ पड़ा मैं ऊपर की ओर!

जाकर देखा तो कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था, दरवाजा खटखटाया; दिल के अंदर अजीब सी हलचल थी, ख़ुशी थी, जल्दी थी दरवाजा खुलवाने की।
मन कर रहा था कि जैसे ही दरवाजा खोलेगी, कस के गले लगा लूंगा उसे।

इन्तजार की घड़ियाँ ख़त्म हुई, उसके दरवाजे के पास आने की आहट हुई, फिर कुण्डी खुलने की… और फिर धीरे से दरवाजा खुलने की आवाज आई।
मैंने अंदर आकर कुण्डी लगाई, लाइट चालू की तो देखा मेरी सलोनी दीवार की तरफ मुंह करके शरमाते हुए खड़ी है। वही कपड़े पहन रखे हैं जो हमने आज के लिए फाइनल किये थे। पेटीकोट, सिल्वर कलर का ब्लाउज, लाल सुर्ख साड़ी।

अब रहा तो मुझसे भी नहीं जा रहा कि इतना पास आके भी दूरी रहे; धीरे से नाम लिया उसका ‘सलोनी…’
पर उसकी तरफ से कोई हलचल नहीं हुई।
फिर मैं पास में गया, उसकी कमर से होते हुए अपना दांया हाथ उसके पेट पे रखा और अपना चेहरा उसके दाहिने कंधे पे टिकाकर उसके कान के पास फिर धीरे से उसका नाम लिया ‘सलोनी…’

इस बार तो वह बिजली सी फुर्ती से पीछे मुड़ते हुए मेरे गले से लग गयी, हाथ मेरी पीठ पर कस गए, चेहरा मेरी छाती में धंसा लिया। साँसें भारी हो गयी, लंबी लंबी साँसे ले रही थी मेरी सलोनी।
मेरे भी हाथ अपने आप उसके पीठ पर रेंगने लग गए।
फिर मेरी उँगलियाँ पता नहीं कैसे उसकी पीठ और कमर पर अपने आप खेलने लगी, जैसे मेरे वश में ही न हो। और मेरी इस हरकत से तो उसकी साँसों में जैसे तूफ़ान सा आ गया, उसने मचल के अपना चेहरा उठा के मेरे सीने पर दूसरी तरफ और जोर लगाते हुए धंसा लिया। उसकी पकड़ और मजबूत हो गयी, ऐसे लग रहा था जैसे वो मेरे अंदर ही घुस जाना चाहती हो।

फिर मैंने हिम्मत करते हुए उसे थोड़ा सा अपने से दूर करने की कोशिश की ताकि मैं अपनी सलोनी को जी भर के देख सकूँ। पर उसने तो जैसे ठान रखी हो ना छोड़ने की।
उसके कान के पास जाके मैं धीरे से फुसफुसाया- सलोनी, प्लीज!
शायद इसका असर हुआ और उसने अपनी पकड़ ढीली की, अपना चेहरा मेरी छाती से हटा कर थोड़ा दूर किया पर नजरें अभी भी झुकी थी।

तो मैंने उसकी ठुड्डी को हाथ से पकड़ कर प्यार से ऊपर किया, आँखों से आँखें मिली। फिर पता नहीं कब चेहरे पास आ गए, होंठ से होंठ जुड़ गए और दोनों एक आनन्दमयी सागर में गोते लगाने लगे। एक दूसरे के होंठों को ऐसे चूसने लगे जैसे यही एकमात्र जरिया है 4 महीने की दूरियों को भुलाने का।
कभी वो मेरे नीचे वाले होंठ को पकड़ के पूरा अपने अंदर खींच लेती, फिर पक्क की आवाज से छोड़ती; कभी मैं उसके मुंह के अंदर तक अपनी जीभ घुसेड़ देता। कभी वो अपनी जीभ मेरे मुंह के अंदर डाल कर मेरी जीभ के साथ खेलने लती।

और इस बीच मैंने अपना दाहिना हााथ उसके सर के पीछे रखा और उसे अपनी और खींच कर और जोर से जुबान लड़ाने लगे, होंठ चूसने लगे। दोनों के मुँह से उम्म्म्म अह की आवाजें निकल रही थी। बीच बीच में पुच्च्च पुच्च्च्च की आवाज आ रही थी पर दोनों में से कोई भी रुकने को तैयार नहीं था।

स्मूच करते करते मेरा दूसरा हाथ उसके उसके बाकी शरीर से खेलने लगा। कभी उसकी नंगी कमर पे आकर चुटकी काट लेता। कभी पीठ पे जाके सलोनी को अपनी ओर खींच लेता, जिससे सलोनी भी मस्ती में आकर और जोर से चूसने और उम्म्म म्म्मह की आवाज करने लगती।

फिर अचानक से सलोनी ने किस करना छोड़ कर अपने चेहरे को मेरे होठों के सामने फिराने लगी। कभी मैं उसके बाएं गाल को मुह में लेकर चूसता और कभी हल्का सा काट देता।
इस बीच मैंने हल्के हल्के उँगलियों की पोरों को उसके गर्दन, कंधे, कानों के आस पास फिराना शुरू किया।

इस क्रिया के बाद जो सलोनी जैसे पूरी ही मस्ती में आ गयी, वो कभी अपनी गर्दन को इधर-उधर फेंकती और कभी जोर से शेरनी की तरह आवाज करते हुए अपनी बाहों को मेरे गले में डाल कर पूरी पीछे की तरफ झुक जाती तो मौका मिलते ही मैं उसके गर्दन पर किस कर लेता।

कुल मिला कर दोनों मस्ती में डूबे थे, सलोनी ने करीब 20 मिनट से अपनी आँखें मस्ती में बंद कर रखी थी। बस इस मिलन का आनन्द लिए जा रही थी; ना खुद कुछ बोल रही थी और न ही मुझे बोलने का मौका दे रही थी।

कुछ समय सलोनी को गालों और गर्दन पे किस करता रहा, फिर उसे गले लगा कर अपना मुंह उसके बांयी तरफ के कान के नीचे ले गया और अपने एक हाथ से बाल हटाते हुए उसके कान के थोड़ा सा नीचे पुच्च्च्च सी आवाज निकालते हुए हल्का सा किस किया, फिर थोड़ा नीचे एक और ऐसे करते करते गर्दन से होते हुए दाहिने कान की तरफ पहुंचा और उसके नीचे जीभ की नोक फेरने लगा, और बीच बीच में किस भी कर देता।

और इन सब पर सलोनी की मदमस्त, मादक आवाजें, सिसकारियाँ मुझे और भी मस्ती में ला दे रही थी।
सलोनी किसी मस्ती में डूबे हुए पागल से कम नहीं लग रही थी जो कभी तो मुझे अपने से चिपका लेती और कभी जोर से सिसकारी लेते हुए जोर से मेरे बाल पकड़ कर मेरा सर पीछे खींच लेती और जोर जोर से स्मूच करने लगती।

बस इसी तरह चूमते चूमते मैं उसके कान की तरफ बढ़ने लगा और मेरा एक हाथ रेंगते हुए उसकी साड़ी खोलने में लग गया। साड़ी खोल के नीचे गिराने के बाद अब मेरी प्यारी सलोनी मेरे सामने बस चमकदार पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी थी।
मैंने अचानक से उसके कान की लौ को जीभ और होठों के बीच ले लिया और उसे धीरे धीरे चूसने लगा और एक हाथ से ब्लाउज का एक बटन खोल दिया।

कान की लौ को चूसते चूसते बीच बीच में हल्का सा काट लेता था ताकि सलोनी की और मादक सिसकारियाँ सुन सकूँ। और इधर मेरा हाथ उसके क्लीवेज को हल्के हल्के सहलाते हुए ब्लाउज के बटन खोलने में लगा था।
जब ब्लाउज पूरा खुल चुका तो उसे निकाल कर साइड में गिरा दिया और अब मेरे सामने वो नजारा आया जिसका मैं इतने महीनों से इन्तजार कर रहा था।
36″ की जालीदार ब्लैक कलर की ब्रा, जिसमें मेरी सलोनी के गोरे गोरे, दूध जैसे चुच्चे खुल कर सामने आ रहे थे।
प्यार से मैंने उनके बीच की खाई में 3-4 किस कर दिए तो सलोनी शर्मा सी गयी।

अब मैं और सलोनी फिर से स्मूच करने लगे और इस बीच मेरे हाथ उसकी नंगी पीठ पर नाचने लगे और सलोनी सिसकारियाँ लेते हुए इसके मजे लेने लगी। इसी तरह उसके ब्रा का बटन ढूंढ कर खोल दिया, और ब्रा भी निकाल कर साइड में गिरा दी और मेरा दाहिना हाथ उसकी कमर से होते हुए उसके बायें बोबे को सहलाने टच करने लगा और करते करते हाथ उसके निप्पल तक जा पहुंचा।
मैंने ध्यान दिया कि जैसे ही मेरा हाथ सलोनी के निप्पल तक पहुंचा, सलोनी ने स्मूच में कोई हरकत करना बंद कर दी और उसका पूरा ध्यान निप्पल की तरफ आ गया, वो इन्तजार करने लगी निप्पल छेड़ने का, पर मैंने भी उसे चिढ़ाने के लिए निप्पल को छोड़ अपना हाथ फिर से उसकी कमर पर फिराने लगा।
और इससे थोड़ी जोश में आई और अधिक उग्रता से स्मूच करने लगी।

मैं एक बार फिर अपना हाथ उसके निप्पल तक लेकर आया और इस बार उसके बायें निप्पल को अपनी तर्जनी ऊँगली से हल्का सा टच किया जिससे सलोनी के मुंह से एक लंबी सी आह्ह्ह निकली। फिर मैंने अपनी उंगली को उसके मुंह में डाला तो वो उसे भी मजे से चूसने लगी।

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वही उंगली अब वापस लाकर उसके निप्पल पर टच किया तो सलोनी जोर से सिसकारी लेते हुए आगे की ओर झुक गयी और जोर जोर से पागलों की तरह स्मूच करने लगी। अब मैंने भी उसे ज्यादा तड़पाना ठीक नहीं समझा और उसके निप्पल को अंगूठे और उंगली के बीच में पकड़ कर हल्का हल्का सहलाना और दबाना शुरू किया।

उसके मुंह से तो अब अलग अलग फ्रीक्वेंसी में सिसकारियाँ निकलने लगी, स्मूच भी कर रही थी और जैसे ही वो और मस्ती में आती, उसके मुंह से निकली हुई सिसकारियाँ मेरे मुंह में दब जाती।
अब दूसरा हाथ में सलोनी के दूसरे निप्पल पर ले आया और उसे भी दबाने, छेड़ने लगा। मस्तायी हुई सलोनी स्मूच करते करते धीरे से बोली- थूको ना!
जो मुझे अच्छे से सुनाई नहीं पड़ने के कारण मुंह हटाना चाहा ताकि वो साफ़ बोल सके। पर उसने मेरे सर को कस कर पीछे से पकड़ लिया और जोर से दबाती हुई स्मूच करने लगी और फिर से बोली- थूको ना, प्लीज. मेरे मुंह के अंदर थूको ना स्मूच करते करते!
ऐसा बोल कर वो भी थोड़ा थोड़ा सा मेरे मुंह में थूकने लगी, तो मैं समझा कि सलोनी अब ये खेल खेलना चाहती है।

बस फिर क्या, मैं भी लग पड़ा उस क्रिया में… और सच में यह भी एक अलग ही तरह का आनन्द था जो उस दिन महसूस हुआ। एक दूसरे के मुंह के अंदर थूकते हुए स्मूच करना, चूसना, चाटना। बस अलग ही दुनिया में खो जाओ; आँखें बंद, पास की दुनिया में क्या चल रहा है कोई मतलब नहीं। बस लगे पड़े हैं एक दूसरे में।

यही करते करते उसके निप्पल को जोर जोर से भींचने लगा, दबाने लगा, मसलने लगा। कभी तो निप्पल को जोर से मसल देता। कभी जोर से अंदर की तरफ चुच्चों के अंदर तक धंसा देता और फिर जोर जोर से गोल गोल घुमाता और कभी दोनों निप्पल पकड़ के बाहर की तरफ पूरा खींच के गोल गोल घुमाता।

सलोनी को इतनी मस्ती में झूलते हुए मैंने कभी नहीं देखा था, एक समय तो ऐसा आ गया कि मस्ती में वो बेहोश सी हो गयी और गिरने लगी; मैंने उसे पकड़ कर संभाला और अपने गले से लगा कर रखा, पर अब उसने कोई भी हरकत करना बंद कर दी। वो पूरी तरह से मेरे हाथों के भरोसे खड़ी थी।

उसने अपना चेहरा मेरे कंधे पर टिका के रखा था, शरीर का भार पूरा मुझ पर डाल दिया पर मैं फिर भी इस आनन्द को रोकना नहीं चाहता था, मैंने उसके निप्पल से हल्के हल्के खेलना जारी रखा।
और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सलोनी ने नशा कर रखा हो और अब उसमें खड़ी रह पाने या बोलने की भी ताकत नहीं है।
हाथ हटा दूँ तो फिर से गिरने को हो जाए।

फिर वो कुछ बुदबुदाने लगी जो साफ़ सुनाई नहीं पड़ रहा था, तो मैंने अपना कान पास में ले जाकर सुनने की कोशिश की।
“मयआआआआंक, आआआज मुझे खाआआ जाओओओ, मत छोड़ना मुझे… मसल के रख दो… 4 महीने से इन्तजार कर रही थी इसका! अब मत छोड़ना मुझे प्लीज!”
और फिर नशे में ही मेरा गला पकड़ के बोली- रुक क्यों गए, करो ना, और करो।

नशे में ही झूलती हुई मेरी गर्दन पकड़ के झूमती हुई आवाज में बोलने लगी- रुक क्यों गए, करो ना, करते रहो ना, जोर जोर से करो ना। जोर जोर से करो। और जोर से करो। जितना जोर है पूरा लगा दो, रगड़ के रख दो आज मुझे, जानवर बन जाओ, जबरदस्ती करो, मैं मना करूँ तो भी रुकना मत; कभी मत रुकना; करते रहना; करते रहो… करो ना प्लीज… कुछ करो ना प्लीज।

मैंने भी उसकी इस हालत का फायदा उठाया और पास में पड़ी चुन्नी उठाई, उसकी आँखों पर कस के बांध दी ताकि उसे कुछ दिखाई न पड़े।
उसके हाथ मेरे कमीज के बटन ढूँढने लगे, एक एक करके उसने सारे बटन खोल दिए फिर कमीज नीचे गिरा दी और मेरी छाती पर हाथ फेरने लगी, मेरे निप्पल को अपने नाखूनों से कुरेदने लगी।

मैंने उसे उल्टा घुमा कर दीवार की तरफ मुंह करके खड़ा कर दिया, उसके हाथ दीवार पर टिका दिए और पेटीकोट का नाड़ा खींच के नीचे गिरा दिया।
उसके हाथ मेरी बेल्ट को खोलने में लग गए और फिर पैंट भी नीचे गिरा दी गयी।
और वो पैंटी में और में अंडरवियर में बचे थे।

उसके हाथ दीवार पे टिका के, गर्दन को पीछे से पकड़ा और दबा के सीधे दीवार की तरफ कर दिया और उसके कान के पास जाके धीरे से बोला- ऐसे ही खड़ी रहना, वरना तेरी चूत और चुचों का वो हाल करूँगा कि 10 दिन तक हाथ नहीं लगाने देगी।
पर इससे तो वो और मस्ती में आ गयी और बोली- करो ना, वैसा हाल करो न प्लीज, आज वैसा ही हाल कर दो मेरा!

इसी बात पर मैंने उसकी दांयी चुच्ची पे हाथ से जोर का चांटा मारा और उसका निप्पल बुरी तरह से मसल दिया।
और ऐसा ही दूसरे चुच्चे और निप्पल के साथ किया।

उसकी सिसकारियाँ तो बढ़ती ही जा रही थी, बीच बीच में बोलती जा रही थी- हाँ ऐसे ही, और जोर से, और जोर से मारो।
मारते मारते उसकी गर्दन पर पीछे से बाल साइड में किये और उसकी गर्दन पर चूम लिया और दोनों हाथों से उसके निप्पल और चुच्चों से खेलना जारी रखा। वो मस्ती में घोड़ी की तरह से अपनी कमर हिलाने लगी और अपना पिछवाड़ा और पीछे निकाल के मेरे लण्ड पर रगड़ने लगी और अपनी कमर को घुमाने लगी।

जैसे ही उसे मेरे कड़क लण्ड का एहसास हुआ, उसने अपनी गांड को और पीछे कर लिया और जोर से मेरे लण्ड पर दबा कर गोल गोल घुमाने लगी।
मैंने उसकी गर्दन पर, कंधे पर, गर्दन के नीचे किस करना जारी रखा, और उसने अपनी गांड रगड़ना।
फिर अचानक उसे पता नहीं क्या हुआ कि उसे अपनी पैंटी खुद ही उतार दी और मेरी अंडरवियर उतारने लगी।
तो मैंने भी इस काम में उसकी मदद की और दोनों पूरे नंगे हो गए।

उसकी नंगी गांड का स्पर्श पाकर तो मेरा लण्ड और भी टनटना गया, जिसका एहसास शायद उसे भी हो गया। वो अचानक से पीछे मुड़ी, घुटनों के बाल नीचे बैठी, मेरा लौड़ा पकड़ा और गप्प से मुंह में ले लिया और एक हाथ से अपनी आँखों से दुपट्टा हटा लिया।

फिर एक हाथ से मेरे टट्टों से खेलने लगी, दूसरे हाथ से लौड़ा पकड़ के मुंह के अंदर बाहर करने लगी, कभी तो लौड़ा गले तक मुंह में ले लेती और फिर बाहर निकाल के उसी लसलसे पानी को लौड़े पर चुपड़ देती और अच्छी तरह से मसाज करते हुए लौड़े को काफी देर तक मुठियाती।
फिर लौड़े का सुपारा मुंह में लेती तो लोलीपोप की तरह उसे चूसती ही रहती।

इस बीच उसके हल्के हल्के दांत सुपारे पर चुभते तो वो भी अच्छा लग रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने सलोनी को हटाने की कोशिश की तो उसने जैसे सुना ही नहीं और चूसती रही। मैंने उसे बताया कि अब कभी भी पानी निकल सकता है और पानी शायद उसे अच्छा न लगे, पर वो सब अनसुना करते हुए लौड़े को मुठियाती रही और झटके दे देकर चूसती रही।

और फिर वही हुआ जिसका डर था, लंड से वीर्य की पिचकारी छूट गयी पर मेरी उम्मीद के विपरीत उस समय भी सलोनी मेरे लौड़े को मुठियाते हुए चूसती रही। उसने पूरा पानी मुंह में भर लिया। और फिर मुंह खोल के सारा वीर्य लौड़े पे गिरा के मसाज करने लगी।

मसाज ख़त्म होने के बाद मेरी तरफ शरारती मुस्कान के साथ देखने लगी और फिर किस करते हुए धीरे धीरे ऊपर आने लगी।
जैसे ही मेरे दाहिने निप्पल के पास पहुंची, उसे अपने नाखून से हल्के हल्के कुरेदने लगी। शायद मुझे आज जन्नत का एहसास दिलाने का सोच रखा था उसने।

मैंने उसको थोड़ा रुकने को बोला तो उसने मेरे निप्पल को मुंह से टच किया और अपनी जीभ से उसके साथ खेलने लगी, और फिर पागलों की तरह चूसने लगी कभी इस निप्पल को तो कभी उस निप्पल को… और बीच बीच में हल्का सा काट लेती।

अब तो मेरा भी सब्र जवाब देने लग गया, मैंने खींच के उसके बाल पकड़े और पलंग पर पटक दिया, उसकी टांगें फैलाई और लगा दी अपनी जीभ उसके चूत के दाने पे। और एक बार तो पूरा दम लगा के रगड़ दिया जीभ से दाने को।
सलोनी अपनी कमर को जोर से उछालने लगी और मेरे सर को पकड़ के दबा दिया अपनी चूत के ऊपर… ऊपर से उसकी सिसकारियाँ… सच में मन कर रहा था कि चूसता ही रहूँ चूत को।
फिर मैंने दाने को छोड़ कर चूत के आस पास चूमना चाटना शुरू किया पर चूत को नहीं छुआ।

थोड़ी देर तो सलोनी इन्तजार करती रही कि अब उसकी चूत पे आऊंगा पर जब उसे लगा कि ऐसे काम नहीं बनेगा चूत चुसवाने का, तो वो अपनी कमर उठा उठा कर मेरे मुंह के सामने लाने लगी। मेरे मुंह पे लगाने की असफल कोशिश करने लगी।
पर मैंने जब इसके बाद भी उसकी चूत को नहीं छुआ तो गुस्से में उसने मेरा सर अपने दोनों हाथों से पकड़ा और जोर से चिल्लाते हुए अपनी चूत के ऊपर दबा दिया, सर को दबाये हुए ही वो अपनी चूत को मेरे मुंह पे बड़ी बेसब्री से रगड़ने लगी और कभी मेरे बाल पकड़ के मुंह को चूत के ऊपर रगड़ने लगी।

अब सलोनी के मुंह से संतुष्टि से गुर्राने की आवाजें आने लगी और करीब 2 मिनट के बाद उसका शरीर अकड़ता हुआ सा महसूस हुआ और फिर मेरी सलोनी कमर उछाल उछाल के झड़ने लगी, सर पकड़ के चूत पे मारने लगी और कुछ ही पलों में एक संतुष्टि भरी मुस्कान लिए साँसों को काबू में करने की कोशिश करते हुए शान्ति से लेट गयी।


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