एकाकीपन में खुशी-2

(Ekakipan Me Khushi-2)

decodr.ru के सभी पाठकों को अशोक का नमस्कार !

दोस्तो, आपने मेरी पहली कहानी

में पढ़ा था कि किस प्रकार मेरी बड़ी बहन रश्मि और मेरे नौकर जावेद ने एक दूसरे की रात रंगीन की थी। अब मैं आपको अगले दिन सुबह की कथा भी बताता हूँ।

रात में दीदी की कामक्रीड़ा देखने के कारण मैं सुबह देर से जागा। सुबह उठते ही मैंने दीदी के कमरे में रोशनदान से झाँका तो देखा, सुबह का कार्यक्रम भी चालू था।

मैंने देखा कि दीदी अपने अन्तःवस्त्रों में ही बिस्तर पर उनींदी सी उल्टी लेटी हैं, जावेद दीदी की जाँघों के ऊपर दोनों तरफ पैर करके बैठा है। जावेद नग्न था और उसका लिंग रात की तरह फिर से आगबबूला हो रहा था। जावेद दीदी के बदन पर हाथ फिरा रहा था। दीदी का शरीर तेल जैसी किसी चीज़ के लेप की वजह से कान्तिमान हो रहा था। दरअसल जावेद उनके शरीर की तेल से मालिश कर रहा था। जावेद अपने हाथों को गोल गोल घुमाते हुए धीरे धीरे तेल को उनकी गर्दन से लेकर पीठ तक रगड़ रहा था।

जावेद ने दीदी की पैंटी की इलास्टिक में अपनी उँगलियाँ फंसाई और पैंटी को खींचकर घुटनों तक उतार दिया। उसके बाद वो दीदी के चूतड़ों की मालिश करने लगा। दीदी की टांगों को उठाकर उसने पैंटी को निकाल कर जमीन पर फेंक दिया और उनकी टांगों को थोड़ा सा फैलाकर फिर से दीदी की जाँघों पर बैठ गया।

फिर उसने दीदी दीदी की ब्रा का हुक खोल कर उसे भी खींचकर निकाल लिया। जावेद ने तेल की शीशी उठाकर दीदी के चूतड़ों के बीच की घाटी में गिरा दी और हाथ से तेल को दीदी की योनि पर फैलाने लगा। जावेद ने जब उँगलियों को दीदी की योनि पर जोर-जोर से चलाना शुरू किया तो दीदी की सिसकारी निकल आई।

जावेद और मैं दोनों ही समझ गए कि दीदी जाग गई है और उत्तेजित हो गई हैं। जावेद ने तेल की शीशी को दबाकर तेल की धार अपने लिंग पर गिराई और तेल को पूरे लिंग पर फैला दिया। फिर लिंग को दीदी की टांगों के ठीक बीच में अवस्थित करके दीदी के ऊपर लेट गया। फिर उसने दीदी की छातियों के नीचे अपने दोनों हाथ ले जाकर उनके स्तनों को पकड़ लिया और जोर-जोर से भींचने लगा। जावेद दीदी के कान और गर्दन पर चुम्बन ले रहा था। दीदी को मजा आ रहा था क्योंकि वो सिसियाते हुए हल्के-हल्के मुस्कुरा रही थी।

जावेद ने दीदी के गालो का चुम्बन लिया तो दीदी ने गर्दन घुमा कर अपने होठों को जावेद के होठों से चिपका लिया। दोनों ने काफी देर तक एक दूसरे के होठों का रसपान किया। जावेद ने कमर को उठाकर लिंग को दीदी की टांगों के बीच स्थापित किया और अपनी कमर को दीदी की तरफ दबा दिया।

दीदी के मुँह से दर्द भरी सिसकारी निकली। जावेद ने कमर को फिर से दबाया और दीदी सिसियाते हुए चीखी- जावेद दर्द हो रहा है धीरे धीरे करो प्लीज़।

मैं समझ नहीं पाया कि माजरा क्या है? अभी कुछ घंटे पहले ही दीदी ने रात में जब तीसरी बार सम्भोग किया था तब जावेद ने पहले ही शाट में आधे से ज्यादा लिंग उसकी योनि में ठूंस दिया था, तब दीदी “चूँ” भी नहीं बोली थी और पता नहीं अब उसे क्यों दर्द हो रहा है?

जावेद बोला- बस एक बार पूरा अन्दर चल जाए तो फिर उसके बाद दर्द नहीं होगा।

दीदी बोली- नहीं, और मत डालो, मैं पूरा नहीं झेल पाऊंगी, इतने से ही कर लो।

जावेद- अभी तो बस टोपा ही अन्दर गया है, इतने में मजा नहीं आएगा।

दीदी- दर्द से मेरी हालत खराब है, तुम कह रहे हो मजा नहीं आएगा?

जावेद- थोड़ा सा तो और डालने दो न, धीरे धीरे डालूँगा।

दीदी- अच्छा, तेल और लगा लो।

जावेद ने अपना धड़ दीदी के ऊपर से उठाया और दीदी की टांगों को फैलाया और तेल की धार उनके चूतड़ों और अपने लिंग पर गिरा दी।

जावेद ने अपनी टाँगें दीदी की टांगों के बीच में कर ली और अपनी टांगों को फैला लिया, इससे दीदी की टाँगे भी चौड़ी फ़ैल गई। जावेद फिर से दीदी के ऊपर लेटा और उसने अपने शरीर का वजन लिंग पर केन्द्रित करके दीदी के ऊपर डाल दिया जिससे लिंग काफी अन्दर तक चला गया।

दीदी चीखते हुए बोली- हाय जावेद, मर गई मैं ! प्लीज़ मत करो, मैं नहीं झेल पा रही हूँ, पहली बार है ! और मत डालो प्लीज़ !

जावेद ने जब अपनी टाँगें फैलाई थी तब मैंने देखा कि उसने अपना लिंग दीदी की योनि में नहीं, बल्कि गुदा में डाल रखा था और इसीलिए दीदी इतना दर्द से तड़प रही थी।

मुझे समझ नहीं आया क्यों दीदी गुदामैथुन के लिए तैयार हुई?

मुझे दीदी की हालत पर तरस आ रहा था, मगर जावेद निर्दयी उस पर वैसे ही लदा हुआ था। वो दीदी को जगह जगह चूम रहा था और उनके स्तनों को दबा रहा था।

मैं समझ गया जावेद फिर से संयम, समय और उत्तेजना में सामंजस्य बैठा रहा है।

जावेद ने पूछा- दर्द है अभी?

दीदी- अभी है।

जावेद- हल्का हुआ है?

दीदी- कुछ हल्का हुआ है !

जावेद- और डालूँ?

दीदी- खबरदार, जो और डालने की बात की तो, तुम्हारी जिद के आगे मैं गुदामैथुन के लिए तैयार हो गई थी, अगर मुझे इस दर्द का पता होता तो कभी राजी नहीं होती।

जावेद- ठीक है, आज इतने से ही काम चलाता हूँ, कल पूरे के बारे में सोचेंगे।

दीदी- कल से अगर गुदामैथुन का नाम भी किया न तो तुम्हें अपने बिस्तर से उठा कर फेंक आऊँगी।

जावेद- अभी एक बार जब मैं गाड़ी चलाऊँगा न, तब कहना मजा आया या नहीं ! मजा ना आये तो आप मेरी गाण्ड मार लेना।

दीदी- तुम्हारी गाण्ड काहे से मारूँगी?

इस पर दीदी और जावेद दोनों हंसने लगे।

जावेद ने दीदी को करवट पे लिटा लिया और पीछे से हल्के हल्के लिंग को गुदा में चलाने लगा। जावेद ने एक हाथ को दीदी की गर्दन के नीचे से ले जाकर उनके एक स्तन को पकड़ लिया और भींचने लगा। दीदी की गुदा का छेद ऐसा लग रहा था जैसे उसमे कोई मोटा पाइप डाल दिया गया हो और उनकी गुदा एक छल्ले की तरह उस पाइप पर कस गई हो। तेल में भीग कर जावेद का लिंग बहुत ही वीभत्स लग रहा था।

जावेद आराम आराम से लिंग को दीदी की गुदा के संकरे सुराख में चलाते हुए मजा ले रहा था। थोड़ी ही देर में दीदी की गुदा उसके लिंग के लिए अभ्यस्त हो गई थी। बीच बीच में जावेद उत्तेजित होकर दीदी की गुदा में कभी लिंग को अन्दर तक दबा देता था तो दीदी हल्के से कसक पड़ती थी।

जावेद ने एक हाथ से दीदी का एक चुचूक पकड़ लिया और उसे गोल गोल घुमाते हुए दबाने लगा और दूसरे हाथ से दीदी के भगशिश्न को को छेड़ना चालू किया। दीदी कुछ ही पलों में मस्ती से सराबोर हो गई थी। अब दीदी आराम से उसके लिंग को ले पा रही थी।

जावेद ने झटकों की लम्बाई और गति दोनों बढ़ा दिए। दीदी और जावेद दोनों के शरीर पसीने से भीग गए। उत्तेजना ने एक बार फिर से दर्द पर विजय पा ली थी।

दीदी ने जावेद के हाथों को अपनी योनि से हटा दिया तो जावेद ने फिर से उनकी योनि को पकड़ लिया तो दीदी बोली- जावेद, मैं बहुत उत्तेजित हूँ और मैं झड झाऊँगी, योनि को और मत सहलाओ।

जावेद ने दीदी के कान में कहा- मैं और अन्दर डालना चाहता हूँ !

दीदी- मुझे दर्द होगा, मुझे इतने में मजा आ रहा है।

जावेद- पूरे में और ज्यादा मजा आएगा।

यह कहानी आप decodr.ru पर पढ़ रहे है ।

दीदी- मैं इतने में ही खुश हूँ।

जावेद- मुझे मजा नहीं आ पा रहा है, प्लीज़ करने दो न। दर्द थोड़ा सा होगा फिर बिल्कुल ऐसे ही ख़त्म हो जाएगा।

दीदी- ठीक है, तुम आराम से करना।

जावेद- नहीं, अगर मैं जल्दी से अन्दर डाल दूँगा तो अभी दर्द थोड़ी देर के लिए ही होगा, धीरे धीरे डालने से देर तक दर्द होगा, अभी तुम उत्तेजित हो तो दर्द को आराम से पी जाओगी।

दीदी- बस देखना, मेरी जान नहीं निकलने पाए।

जावेद- छेद तो मैंने बंद कर रखा है कहाँ से निकल पाएगी?

इस पर दोनों हंसने लगे।

जावेद ने दीदी की कमर को कसकर पकड़कर शाट मारा। जावेद का लिंग थोडा सा ही दीदी की गुदा में गया। दीदी ने हल्की सिसकारी ली। दीदी ने अपनी आँखें बंद कर ली थी और होठों को भींच लिया था। साफ़ जाहिर था उसे हल्का दर्द तो अभी भी हो ही रहा था।

जावेद ने अगला धक्का जोर से लगाया। दीदी इस बार दर्द से हल्का सा चीख ही पड़ी थी और कमर को आगे की तरफ खींचने लगी मगर जावेद ने उनकी कमर को जकड़ कर आगे नहीं बढ़ने दिया बल्कि अपने लिंग को दीदी की गुदा में दबाये रखा।

दीदी ‘आह आह’ कर रही थी।

जावेद ने दीदी को दिलासा देते हुए कहा- बस जान ! थोड़ा सा ही बाकी है, एक बार और हिम्मत कर लो बस।

दीदी ने कहा- बहुत दर्द कर रहा है।

जावेद- बस एक बार और होगा फिर नहीं होगा।

जावेद ने दीदी को झूठी दिलासा दी थी, अभी कम से कम 3-4 इंच लिंग गुदा के बाहर ही था।

जावेद ने दीदी के चुचूकों को दो मिनट सहलाया, दीदी जब कुछ सामान्य सी हुई तो उसने दीदी की कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया।

दीदी एलर्ट हो गई। मैं समझ गया अबकी दीदी की जान पर बन आनी है और वही हुआ।

जावेद ने पूरी जोर से जबरदस्त झटका मारा और लिंग को काफी अन्दर ठूंस दिया।

दीदी चीखते हुए रोने लगी और जल बिन मछली की तरह तड़पते हुए अपने को जावेद की जकड़ से छुड़ाने की कोशिश करने लगी, मगर उसकी कोशिश नाकाम रही।

जावेद ने बगैर देर किये दो और जबरदस्त धक्के मार कर अपना लिंग जड़ तक दीदी की गुदा में ठूंस दिया। दीदी ने बहुत संघर्ष किया मगर जावेद दीदी की गुदा के ऊपर लद गया तो दीदी का संघर्ष बेकार हो गया।

जावेद ने दीदी की कमर को छोड़कर उनके स्तनों को पकड़ लिया और जोर जोर से भींचने लगा। दीदी बहुत ही बुरी तरह रो रही थी। जावेद उनके कान और गर्दन पर चुम्बन लेते हुए उनका ढांढस बंधा रहा था।

जावेद दीदी के ऊपर वैसे ही तब तक लेटा रहा जब तक दीदी विरोध करती रही। जब दीदी का शरीर ढीला पड़ गया और दीदी का रोना बंद हो गया तो वो दीदी के ऊपर से उतर के फिर से करवट पर आ गया।

दीदी कुछ बोल नहीं रही थी। जावेद ने उनकी योनि को ऊँगली से सहलाते हुए उन्हें फिर से उत्तेजित करने की कोशिश की। एक हाथ से वो दीदी के एक चुचूक को छेड़ रहा था, एक हाथ से दीदी के भगोष्ठ को सहला रहा था और साथ ही एक चुचूक को मुँह में लेकर चूस रहा था।

यह मिली-जुली कोशिश थी दीदी को जल्द से जल्द उत्तेजना देने की और उसकी कोशिश दो मिनट में ही रंग लाई। दीदी हल्की-हल्की मस्ती से सिसियाने लगी थी। इसी के साथ जावेद ने अपने लिंग को दीदी की गुदा में हल्के हल्के अन्दर बाहर मर्दन शुरू कर दिया। दीदी अब पहले की तरह दर्द नहीं महसूस कर रही थी। शायद अब उसकी गुदा में जावेद के लिंग लायक जगह बन गई थी। जावेद ने भी कुछ देर मर्दन करने के बाद आयाम बढ़ा दिया। उसने २-३ इंच लिंग को बाहर खींच कर वापस दीदी की गुदा में डाल दिया। दीदी हल्के से सिसिया उठी। जावेद ने अगली बार अपना आधा लिंग निकाल कर दीदी की गुदा में डाला। दीदी इस बार भी वैसे ही सिसियाई मगर चीखी नहीं।

जावेद ने अपना दायरा तय कर लिया। वो अब धीरे धीरे दीदी की गुदा में झटके मारने लगा। दीदी मामूली सी तकलीफ के साथ जावेद का साथ दे रही थी। दीदी उत्तेजित भी लग रही थी क्योंकि वो खुद अपनी योनि को अपनी उँगलियों से छेड़ रही थी।

जावेद भी दीदी की कसी हुई गुदा पाकर काफी उत्तेजित हो गया। उसने झटकों की गति बढ़ा दी तो दीदी ने उसे रोकते हुए कहा- जावेद आराम से करो, मुझे तकलीफ हो रही है। मैं तुम्हारा साथ दे रही हूँ न, फिर तुम भी मेरा साथ दो न।

जावेद ने कहा- वो क्या है न, मस्ती में मैं काबू खो देता हूँ।

दीदी ने कहा- तुम जब हल्के हल्के करते हो तो मुझे भी अच्छा लग रहा है।

जावेद- धीरे धीरे करूँगा तो मुझे झड़ने में बहुत वक्त लगेगा।

दीदी- चाहे जितना समय लगे, मैं तुम्हारा साथ दूँगी, तुम मेरी भी मस्ती का ध्यान रखो न, प्यार का मजा मत खराब करो, आज पहली बार है न।

जावेद- तुम्हें अब मजा आ रहा है?

दीदी- थोड़ा-थोड़ा।

जावेद- फिर ठीक है जान, तुम्हें पूरा मजा दूँगा।

जावेद ने वैसे ही धीरे धीरे झटके लगाते हुए दीदी की गुदा को अपने लिंग से कूटना जारी रखा। दीदी आराम से उसके लिंग को अब पूरा पूरा अपनी गुदा में बगैर तकलीफ के ले पा रही थी। जावेद दीदी के स्तनों से खेलते हुए, उनके होठों का रसपान करते हुए, दीदी की गुदा का आनन्द उठा रहा था।

दस मिनट बाद जावेद की साँसें गहराने लगी। उसने अचानक झटकों की गति बढ़ गई, उसने दीदी के स्तनों को दबोच लिया और कांपते हुए अपना लिंग जड़ तक दीदी की गुदा में ठूंस कर ठहर गया। दीदी समझ गई की जावेद झड़ गया है। दीदी ने उसके होठों को अपने होठों से चिपका लिया और उसे खूब जोर-जोर से चूमा।

पाँच मिनट बाद दोनों ने एक दूसरे को अपने अपने होठों के बंधन से मुक्त किया। जावेद काफी संतुष्ट और थका हुआ दिख रहा था। दीदी हल्के हल्के मुस्कुरा रही थी। उसका लिंग अभी भी दीदी की गुदा में ही था।

दीदी ने उस से कहा- अब इसे निकालोगे या मेरी गुदा में ही डाले रहोगे?

जावेद ने अपने लिंग को बाहर को खींचा। वीर्य से सना हुआ लिंग जब बाहर निकला तो वो शिथिल हो चुका था। दीदी की गुदा का छेद जावेद के लिंग के निकलते ही फिर से पहले की तरह संकीर्ण हो गया। दीदी ने उसके लिंग को मुँह में लेकर उस पर लगे वीर्य को चूस लिया।

जावेद ने दीदी से पूछा- कैसा लगा?

दीदी- अच्छा था।

जावेद- फिर से करोगी?

दीदी- आज नहीं।

जावेद- क्यों?

दीदी- दर्द कर रही है। पहली बार है न।

जावेद- धीरे धीरे करूँगा।

दीदी- नहीं, पहले मेरी रानी का ख्याल करो, यह प्यासी है।

जावेद- ठीक है, रानी की बहन की सेवा हो गई, अब रानी की खातिरदारी की जाए, मगर सेवक को थोड़ा सा मौका तो दो।

दीदी- सेवक को मैं अच्छी तरह तैयार करना जानती हूँ।

इतना कह कर दीदी ने जावेद के हाथों को लाकर अपने स्तनों पर रख दिया और जावेद के लिंग पर बैठकर अपनी योनि को लिंग से रगड़ने लगी। जावेद दीदी के स्तनों से खेलने लगा।

दीदी- इन्हें खूब जोर से दबाओ।

जावेद दीदी के स्तनों को जोर-जोर से दबाने लगा। दीदी के स्तनों पर उसकी उँगलियों के निशान पड़ने लगे थे। कुछ ही मिनटों बादइ धर दीदी के स्तन लाल हो रहे थे और नीचे उसका लिंग और दीदी की योनि फिर से क्रोध में लाल हो रहे थे।

दीदी और जावेद ने एक बार और लिंग और योनि के घमासान को देखने का मौका दिया। उसके बाद दोनों शांत होकर सो गए।



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