दिल्ली की दीपिका-6

(Dilli Ki Dipika-6)

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हैल्लो दोस्तो, मैं हूँ आपकी वही दिल्ली वाली दीपिका !

मैं आपको अपनी सम्भोग-आनन्द कथा सुना रही थी जिसमें मैंने जिस लड़के अभि को पहले सैक्स करने दिया, दूसरे दिन मेरे अवास्तविक जन्म दिन पर वह अपने दो और दोस्तों को लेकर आ गया और फ़िर इन तीनों ने मिल कर जो मुझे मसला वो सब मैं आपको बता ही चुकी हूँ।

इन तीनों ने मुझसे सैक्स किया। इनसे जी भर कर चुदने के बाद जब मैं इन्हें बाहर तक छोड़कर वापस आ रही थी, तो अपने रसोइए दीपक के कमरे की लाइट जलती देखकर मैंने दरवाजे से झांक कर देखा तो वो मुझे एकदम नंगा होकर अपना लौड़ा हिलाते हुए दिखा। अब आगे !

रसोइया दीपक ने हमें सैक्स करते हुए देख लिया होगा, तो गजब हो जाएगा यह सोचते हुए मैं अपने कमरे में आ गई। जबरदस्त चुदाई की वजह से मेरा बदन दुख रहा था और मुझे बहुत नींद भी आ रही थी। सो दिमाग से सब सोच किनारे कर मैं बिस्तर में लेटी और जल्दी ही सो गई।

दूसरे दिन डोर बेल की आवाज सुनकर मेरी नींद खुली। उठकर दरवाजा खोला तो ड्राइवर सुरेश व रसोईया दीपक सामने खड़े थे।

मैंने पूछा- क्या बात है? तुम दोनों यहाँ कैसे?

ड्राइवर सुरेश बोला- 10 बज रहे हैं बेबीजी, इतनी देर हो गई और आप नहीं उठी, तो हमें आपकी चिंता हो गई थी। दीपक दो बार आपकी चाय लेकर आया। उसने दरवाजे को खटखटाया भी पर आपका कोई जवाब ना पाकर इसने मुझे बताया तब मैंने बेल बजाई। यह भी हम 3-4 बार बजा चुके हैं तब आप आई हैं। आप ठीक हैं ना?

मैं बोली- हाँ मैं बिल्कुल ठीक हूँ। ओफ्हो… सारी कल थकान के कारण मुझे बहुत नींद आ रही थी। इस कारण मैं तुम लोगों की आवाज सुन नहीं पाई हूंगी। इसके लिए सॉरी ! और मैं बिल्कुल ठीक हूँ। दीपक भैय्या, तुम चाय ले आओ, तब तक मैं फ्रेश हो लेती हूँ !

यह बोलकर मैं रूम में टायलेट की ओर बढ़ी। फ्रेश होने के बाद मैं बाहर आई और रसोईये को आवाज दी- दीपक भैय्या, चाय दीजिए !

मेरी आवाज देते ही ड्राइवर रसोई से निकलकर बाहर खड़ी कार को साफ करने लगा। रसोईया चाय की ट्रे लेकर मुझ तक पहुँचा।

मैं रूम में आ गई। वह भी मेरे पीछे आया और मेरी ओर ट्रे बढ़ा दी।

मैंने कप उठाया और चाय पीने लगी।

दीपक ने पूछा- नाश्ते में क्या बनाऊँ बेबी जी?

मैं बोली- नहीं, आज नाश्ता नहीं। खाना ही बनाओ।

अब उसने पूछा- आपकी तबियत खराब है क्या? जो आज आप सोईं भी देर तक और नाश्ता भी नहीं कर रही हैं।

मैं बोली- तबियत तो ठीक है भैय्या, बस हाथ पैर बहुत दुख रहे हैं।

वह बोला- तबियत ठीक है ना बस। मैं डर रहा था कि आपकी तबियत खराब ना हो।

मैं बोली- नहीं तबियत बिल्कुल ठीक है।

चाय देने के बाद वह गया। अब मैं अपनी ड्रेस निकालकर नहाने के लिए वाशरूम गई। तैयार होकर मैं आई, और यूँ ही बाहर देखने निकली तो फिर रसोईया दीपक व ड्राइवर सुरेश को फिर एक साथ बात करते दिखे, तो मुझे थोड़ी चिंता हुई क्योंकि इन दोनों के दोस्ताना संबंध इतने अच्छे नहीं हैं कि इनमें इतनी ज्यादा बात हो।पर अभी इन्हें कुछ कहना ठीक नहीं होगा, खाते समय दीपक से ही बात करूँगी सोचकर मैं अपने कमरे में आ गई।

यह कहानी आप decodr.ru पर पढ़ रहे है ।

मैं सोच में पड़ गई कि इन दोनों के बीच आखिर क्या बात चल रही है? कहीं ये दोनों मेरी मस्ती की बात को डैड या माम को बता दिए, तो यह मेरे लिए गड़बड़ हो जाएगी। क्योंकि जैसा मेरा अनुमान था यह दोनों मुझसे कुछ पाने, या मुझे चोदने के बारे में कभी सोच भी नहीं सकते। साले मेरे खुद के कई बार लाइन देने व इनके अंगों से रगड़कर चलने के बावजूद बदले में एक बार भी कोई संकेत नहीं दिए हैं, तो अब जबकि मॉम-डैड ने इन्हें मेरा ख्याल रखने कह कर गए हैं तो ये मेरा ख्याल ही रखेंगे, मुझे कुछ कहने या मेरे साथ कुछ करने के बारे में सोच भी नहीं पाएँगे। इस तरह की बातें सोचते हुए मैं वहीं आँख बंद करके बैठ गई।

कुछ देर में रसोईये की आवाज आई- बेबी जी, आपको पूछने के लिए कोई आया है। मैं बाहर आई।

अभि आया था, मैंने उससे पूछा- क्या बात है?

वह बोला- कल से मुझे आपकी चिंता हो रही थी ! बहुत देर तक खुद को आश्वस्त करता रहा कि आप ठीक होंगी। पर अब जब मन नहीं माना तो आपसे मिलने चले आया।

मैंने सोचा कि इसे यदि ‘ठीक हूँ’ बोलूंगी तो यह कोई बहाना ढ़ूंढ आज भी चुदाई में लग जाएगा, तो मैं चेहरे पर दर्द लाते हुए बोली- नहीं यार, तबियत कुछ ठीक नहीं है। कल मेरे बर्थडे का रिटर्न गिफ्ट ही मुझ पर भारी पड़ गया।

अभि इससे थोड़ा चिंतित लगा और मेरे मस्तक पर हाथ रखकर देखने के बाद बोला- सारी जानू, मुझे माफ करना। मैं उन्हें आपका बर्थडे सेलिब्रेशन के लिए लाया था, पर वह सब भी हो गया जो मैंने सोचा भी नहीं था।

मैं उसे टालने के लिए बोली- उह… कोई बात नहीं। जो हुआ, उसे भूल जाओ। अब सब बाद में देखेंगे।

मेरे यह बोलते ही वह बड़ी आशा से बोला- यानि अभी आपका सैक्स का बिल्कुल भी मूड नहीं है ना।

मैं बोली- न बाबा ! यह कहानी आप decodr.ru पर पढ़ रहे हैं।

अभि बहुत उदासीपूर्ण लहजे से बोला- ओके, ठीक है फिर ! यह बोलकर वह वापस जाने के लिए बढ़ लिया। मुझे अभि पर थोड़ा संदेह हुआ तो बाहर झांककर देखी तो उसके साथ उसका एक दोस्त और था जिसके साथ बात करते हुए अब वह जा रहा था।यानि यदि अभी मैंने उसे ग्रीन सिग्नल दिया होता तो वह अपने इस दोस्त से भी मुझे चुदवाता। खैर उसे जाते हुए देखने के बाद मैं अपने कमरे में आ गई। अब मेरे मन में यूँ ही सवाल उठने लगे कि यदि अभि, राहुल, या साहिल मुझे अपने दोस्तों से चुदवाने आते रहे तो फिर मेरी पोल खुलते और बेइज्जत होते ज्यादा टाइम नहीं लगेगा। अब मुझे इनका विकल्प खोजना पड़ेगा क्योंकि मेरी चूत का गेट अब खुल गया हैं, इसलिए इसमें और लण्ड लेने की इच्छा बढ़ेगी, इसकी भूख-प्यास मिटाने और इज्जत यूँ ही बनाए रखने के बारे में सोचने लगी।

तभी मेरा ख्याल अपने रसोईये दीपक व ड्राइवर सुरेश पर आया। कल की चुदाई यदि रसोईये ने देख ली होगी, तो मुझे वैसे ही उससे चुदना होगा, और यदि ऐसे ही इससे चुदी तो फिर डैड-माम का प्रेशर भी इन पर रहेगा। इन दोनों से चुदना ही मेरे लिए ठीक रहेगा।

यह सोचकर मैं अपने कमरे को ठीक करने में लग गई।

थोड़ी देर बाद रसोईया दीपक ने मेरे कमरे के बाहर खड़े होकर मुझे आवाज दी, मैं निकली और पूछा- क्या बात है?

वह बोला- खाना तैयार है बेबी चलिए।

मैं ‘ठीक है।’ बोलकर उसके पीछे ही चल पड़ी। मेरे डायनिंग टेबल पर बैठते समय उसका हाथ मेरे चूतड़ों से लगा, मैंने भी अपनी कमर और पीछे कर दी ताकि इसे सब ठीक लगे। पर अपना हाथ और कहीं रखने की इसकी हिम्मत नहीं हुई। मैं भी कुर्सी खींचकर बैठ गई। इसने खाना परोसकर मेरे सामने रखा और खुद भीतर पापड़ सेंकने गया।

मैं खाना खाना शुरु किया। इस तरह खाना खाते तक वह मुझसे अपनी नजरें चुराता ही रहा। तब मुझे लगा कि यह मेरे सामने तो खुल नहीं पाएगा लिहाजा पहल मुझे ही करनी होगी।

मैंने उसे कहा- अब मुझे कुछ नहीं चाहिए, तुम बैठ जाओ।

वह ‘जी !’ बोलकर वहीं कोने में जाकर खड़ा हो गया।

मैं बोली- कल तुम सोने के लिए जल्दी चले गए थे। मुझे तुम्हारी जरूरत पड़ी थी, तब तुम नहीं थे।

वह बोला- मैं कहीं नहीं गया था, यहीं दरवाजे के पास ही था। आपकी आवाज सुनकर तुंरत चला आता।

मैं बोली- तो तुम यह भी देख रहे थे कि हम लोग भीतर क्या कर रहे हैं ना?

वह बोला- नहीं।

मैं बोली- फिर तुमने यह भी ध्यान नहीं रखा कि मैं कैसी हूँ, किस हाल में हूँ या मुझे और किसी चीज की जरूरत तो नहीं है? मैं डैड से कहूंगी कि आप बेकार ही दीपक भैय्या पर भरोसा करते हैं। उन्होंने तो मेरा ध्यान रखा भी नहीं।

दीपक बोला- नहीं, हम आपको सब बता रहे हैं। जब आप अपने दोस्तों के साथ रूम में थी और हम यहाँ खड़े होकर इन लोगों के जाने का इंतजार कर रहे थे। तभी आपके चीखने की आवाज आई।

कहानी जारी रहेगी।


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