दिल्ली की दीपिका-1

(Dilli Ki Dipika-1)

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हैल्लो दोस्तो, मैं दीपिका हूँ, decodr.ru काफी दिनों से पढ़ रही हूँ। सच कहूँ तो इसकी कहानियाँ हमें आपस में जोड़ती हैं। किसने अपने बदन की आग बुझाने के लिए क्या किया, यह हमें जानने को मिलता है।

मैं तो कहूँगी कि सैक्स पर हमें भी खुलकर बात करनी चाहिए, या हिस्सा लेना चाहिए क्योंकि यह ऐसी आग है कि इसे जितना भी दबाया जाएगा, यह उतनी ही भड़केगी इसलिए हमें इसे पश्चिमी देशों की तरह खुलकर स्वीकार करना चाहिए। अब समय आ गया है जब भारत को अच्छा बनाने के लिए आचार्य रजनीश की बात मानी जाए, जो साफ-साफ कहते थे कि जैसा मन में हैं वैसा कर लो, पर यह ध्यान रखो कि इसमें किसी का दिल ना दुखे।

किन्तु अफसोस हम उनकी सीधी बात का अनुसरण करने के बदले कुछ छद्दम बाबाओं की बात सुनते आ रहे हैं, ये बाबा हमें खुद तो धर्म के रास्ते चलकर सैक्स सहित सभी बुराइयों से दूर रहने की बात कहते हैं पर असलियत में सैक्स का लालच इन्हें भी नहीं छोड़ता हैं, लिहाजा उनमें कुछ का हश्र अब सबके सामने है।

अपनी कहानी की शुरूआत में आपके लिए मैंने अपने मन की बात कह दी।

अब मैं खुद से आपका परिचय कराती हूँ, मैं दिल्ली में रहती हूँ, मेरी उम्र 22 साल हैं, और दिल्ली के पॉश समझे जाने इलाके लाजपतनगर में अपनी मम्मी व पापा के साथ रहती हूँ। मैं अपने मॉम डैड की इकलौती संतान हूँ यानि मेरे भाई बहन नहीं हैं। शुरू में मुझे अपने मॉम डैड पर बहुत गुस्सा आता कि उन्होंने मेरे लिए ही सही एक भाई या बहन को क्यूं पैदा नहीं किया, जिसके साथ मैं खेल या झगड़ा कर सकती। पर बाद में मुझे पता चला कि मैं जब गर्भ में थी तब माम-डैड मसूरी गए थे, जहां एक एक्सीडेंट में मॉम बुरी तरह घायल हो गई। उस समय ही अस्पताल में डाक्टर्स ने आपरेशन कर मॉम की डिलवरी कराई, और मैंने जन्म ली। मॉम का गर्भाशय भी निकालना पड़ा, जिससे वो फिर से मां नहीं बन सकती थी। लिहाजा डैड व मॉम को अकेले मुझसे ही काम चलाना पड़ा। तो यह मेरे परिवार की बात थी, अब अपनी कहानी में मैं अब तक की सैक्स लाइफ को यानि मेरी चूत से पहली बार रज कैसे निकलाऔर अपनी चूत की सील मैंने कैसे तुड़वाई, इसे बताऊँगी। तो तैयार हैं ना आप लोग मेरी कहानी से जुड़ने के लिए…

हाँ, मैं अभी बीटेक कर रही हूँ, मेरे बदन का आकार- मेरे दूध 34 सी, कमर 27″ व चूतड़ 35″ के हैं। जैसा मैंने decodr.ru की कहानियों में पढ़ा है वह सही है कि इस समय यानि युवावस्था में सैक्स की इच्छा बहुत होती है। हर समय चूत में कुछ घुसाने का मन होता है। शर्म के कारण हम लड़कियाँ किसी लड़के को चोदने के लिए तो नहीं कह सकती, लिहाजा अपनी सहेलियों से ही अपने चुच्चे दबवा कर मन को बहलाया करती।

मेरी सहेलियों का हाल भी मेरे जैसा ही था, इनमें से एक प्राची तो कई बार मेरे उरोज, जांघों, चूत व चूतड़ों पर हाथ फिरा लिया करती। वह बातें भी बहुत उत्तेजक करती थी।

एक बार हमारे कालेज से टूर गया जिसमें प्राची भी साथ गई। इत्तेफाक से हम लोगों को रात में सोने के लिए एक ही कमरा मिला। दिन भर घूमने और मस्ती करने के बाद रात को हम जब सोने के लिए बिस्तर पर आए तब पहल उसने ही की, वह मुझसे इस तरह चिपकी मानो मेरे भीतर ही घुस जाना चाहती हो। इधर उधर हाथ लगाने के बाद उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ चिपकाए और चूमने लगी। अब मुझे भी इसमें मजा आने लगा, मेरी वासना भी भड़की, तब मैंने उसके स्तन व चूत सहलाकर अपनी दबी इच्छा को पूरी करने का प्रयास किया। इस रात पहली बार मेरी नंगी चूत पर किसी दूसरे ने अपना हाथ फिराया, तथा जीभ व उंगली से चूत के रज को झड़ाया। बाद में प्राची ने बताया कि उसके साथ ऐसा ही काम पहली बार उसकी भाभी ने किया था।

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और बाद में और ज्यादा मजा दिलाने के लिए पहले उसके भाई का लण्ड उसे छुपाकर दिखाया व बाद में उसकी फरमाइश पर भाई से उसकी चुदाई भी करा चुकी हैं।

तो इस तरह उस रात को मेरी चूत से पहली बार रज का स्खलन मेरी सहेली के ही चूत रगड़ने व चाटने के कारण हुआ। उस दिन मुझे बहुत अच्छा लगा पर अपनी चूत की रगड़ाई व चटवाई से चुदने की इच्छा और बढ़ गई।

मेरे घर में दो नौकर भी हैं जो रसोई व ड्राइवरी का काम करते हैं। मेरी हालत इतनी खराब हो गई थी कि मैं इनसे चुदवाने की सोचने लगी, इसके लिए योजना बनाने लगी। मैंने सोचा कि बाहर कहीं जुगाड़ ना हो तो अपने रसोइए व ड्राइवर को ही अपनी चुदाई के लिए तैयार करके रख लूँ। रसोई में जानबूझकर रसोईए से टकराती और उससे रगड़कर चलती, ताकि मेरे बदन की गर्मी उसका लौड़ा खड़ा कर सके। पर वह अपनी नौकरी के डर से मेरी हरकतों को अनदेखा करता रहा। यह कहानी आप decodr.ru पर पढ़ रहे हैं।

फिर इससे निराश होकर मैंने मम्मी से कहकर कार चलाना सीखने की जिद की, और इसके लिए ड्राइवर को कार चलाना सिखाने कहा। इसमें कार चलाने से ज्यादा मेरा ध्यान अपने ड्राइवर के लौड़े पर लगा रहता। मुझे ड्राइविंग सीट पर बिठाकर जब वह स्टेयरिंग संभालने के बारे में बताता तो मैं अपने दूध को उसके हाथों से सटाती व कमर उठाकर चूत को उसके हाथ से रगड़ती।ड्राइवर समझदार था, वह बिना मेरे बोले मेरे दूध व चूत और चूतड़ों पर भी हाथ फेर दिया करता, इससे मुझे बहुत अच्छा लगता। अपनी इस तरह हल्की फुल्की रगड़ाई मैंने जारी रखी। मुझे लगा कि ड्राइवर हल्के मजे के लिए तो ठीक है पर यह अपनी नौकरी के डर से मुझे चोद नहीं पाएगा।

तो मैंने अब अपना ध्यान बाहर की ओर लगाया। हमारे घर के पास रहने वाला एक लड़का मुझे ठीक लगा। योजना के अनुसार मैंने उसे लाइन देना शुरू किया, अब वह लड़का मेरा चक्कर काटने लगा। एक दिन मुझे रोककर उसने फूल दिया। मैंने फूल ले लिया तथा उसका उत्साह बढ़ाने के लिए थोड़ी बात भी कर ली जैसे- मसलन क्या करते हो, घर में कौन-कौन हैं आदि।

मेरे बात करने से वह फूलकर कुप्पा हो गया और मुझ पर जान देने की बात अपने दोस्तों में करने लगा। उसका नाम आपको बताना ही भूल गई, उसका नाम अभि है, वह भी मेरे ही कालेज में है। तो इससे मेरी बात और प्रेम की पींगें बढ़नी शुरु हुई।

बात करने के साथ ही वह मुझे अक्सर गिफ्ट भी लाकर देने लगा। मैंने उसे गिफ्ट के लिए मना किया, तो बड़ी ही स्टाइल से उसने कहा कि गिफ्ट देना उसका शौक है, इसलिए इसके लिए मना मत करिए।

मैं भी शांत हो गई कि लाओ गिफ्ट और कर लो अपना शौक पूरा।

इस तरह हम लोगो का प्यार पलते रहा।

कहानी जारी रहेगी।



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