देसी भाभी का प्यार और सेक्स-1

(Desi Bhabhi Ka Pyar Aur Sex- Part 1)

नमस्कार दोस्तो, मैं राज, रोहतक से हाजिर हूँ अपनी नई कहानी लेकर, जो अभी पिछले महीने यानि मार्च महीने की है.
मेरी पिछली कहानी थी
दीदी की पड़ोसन को चोद डाला
आपको अपने बारे में कुछ बता दूं, मैं छह फीट की हाइट का मस्त जाट लड़का हूँ और रोहतक के पास के ही गांव का रहने वाला हूँ. दोस्तो, मेरे गांव का नाम मत पूछना क्योंकि मैं सभी बातें गुप्त रखता हूँ.

मैंने आज तक बहुत सी चुत चोदी हैं. कुछ दिल्ली में, कुछ रोहतक में … लेकिन गांव की इस चुत की बात ही सबसे अलग थी, क्योंकि बहुत मेहनत से जो मिली थी. फिर आप तो जानते ही हैं कि मेहनत का फल मीठा होता है.

मेरी आप सभी से एक प्रार्थना है कि मुझसे किसी लड़की या औरत का पता या फोन नम्बर पूछने का कष्ट ना करें.

बहुत से दोस्तों की तरह मुझे भी कॉल ब्वॉय बनने का शौक है. मैं भी अखबार में मित्रता क्लब का विज्ञापन देखकर वहां फोन करता. एक दो बार रजिस्ट्रेशन के नाम पर उन्होंने कुछ रूपये भी लिए, लेकिन कुछ नहीं हुआ. तो मैं आपको कहना चाहता हूँ कि प्लीज ऐसे फालतू के विज्ञापनों के चक्कर में पड़कर पैसे बर्बाद मत करना.

यह कहानी मेरी और मेरे पड़ोस में रहने वाली एक औरत की है, जिसका नाम अनुषी (काल्पनिक) है. पहले पहल हम एक दूसरे को देखते भी नहीं थे. फिर बाद में कैसे अनुषी मुझसे चुद गई, उस रंगीन चुदाई की कहानी को आपके सामने पेश कर रहा हूँ.

पहले मैं आपको उसके परिवार के बारे में बता दूं.

अनुषी के पति का नाम अमित (काल्पनिक) है. अमित मुझसे दो साल छोटा है. उसकी शादी को पांच साल हो गए हैं. उसके एक लड़का और एक लड़की है. अमित खेती बाड़ी करता है और उसके पास ट्रैक्टर ट्राली और खेती का खुद का सारा सामान है, मतलब एक तरह से वो एक संपन्न परिवार है. अमित के पिता भी खेतों के काम में लगे रहते हैं.

मैं जब दसवीं कक्षा में था, तो वो आठवीं कक्षा में था. तब वो हमारे खेत का पड़ोसी था. उस वक्त उससे थोड़ी बात होती रहती थी. अब हमने भी खेतों में घर बना लिया है, जो अमित के घर के पास ही है.

फिर जब से हमने नए घर में रहना शुरू किया, तो हमारे में ज्यादा बोलचाल नहीं थी. मैं खुद भी किसी से ज्यादा बात नहीं करता था. दूसरों की नजरों में मैं बहुत शरीफ हूँ, पर उनको क्या पता कि मैं तो चूतों का आशिक हूँ.

मुझे कभी अनुषी दिख जाती, तो वो मुझे देखते ही घूंघट निकाल लेती थी. मैं आपको अनुषी के बारे में थोड़ा बता दूं. अनुषी की हाइट ज्यादा नहीं है, वो पांच फुट के करीब ही होगी.

शुरुआत में तो अनुषी में मेरी ज्यादा रूचि नहीं थी … क्योंकि मैं अपनी गर्लफ्रेंड के साथ ही ज्यादा व्यस्त रहता था. घर पर फोन में, बाहर उसके साथ. मेरा काम ही ये था कि बस खाया पिया और अपनी गर्लफ्रेंड के साथ फोन पर लग गया. लेकिन कुछ दिन बाद मेरी गर्लफ्रेंड की शादी हो गई.

हमारे भारत में एक बात है लड़के कहते हैं कि लड़की धोखा दे गई … और लड़की कहती है लड़का धोखा दे गया. लेकिन मैं कभी नहीं कहता कि मेरी गर्लफ्रेंड ने मुझे धोखा दिया. घरवालों के दबाव में उसने किसी और से शादी कर ली थी.

शादी के बाद भी उसके फोन आने लगे, तो मैंने मना कर दिया … ताकि उसे कोई मुसीबत ना आ जाए.

हालांकि मुझे उसकी बहुत याद आने लगी थी और मैं उसकी यादों में ही खोया रहता. फिर मैं धीरे धीरे उसकी यादों से खुद को दूर करने लगा और सोचा कि अब किसी से दिल नहीं लगाऊंगा.

अब मैं अपना ध्यान काम पर लगाने लगा और कभी अनुषी दिख जाती, तो कुछ कुछ होने लगता था. क्योंकि अब मेरे लंड को चुत की जरूरत महसूस होने लगी थी.

अनुषी को देख कर मैं सोचने लगा कि क्या करूँ. मैं कुछ भी तय नहीं कर पा रहा था. उसी समय अमित के चाचा की लड़की, जो बाहरवीं में थी, वो आते जाते मुझे देखती … तो मैंने पहले उसे पाने की सोची. उसका नाम ऋतु (काल्पनिक) है वो ज्यादा सुन्दर तो नहीं थी. लेकिन मुझे किसी की सुन्दरता से कोई मतलब नहीं होता, बस वो पलंग पर चुदाई में पूरा साथ देती रहे, मैं बस यही चाहता था.

मैं ऋतु पर लाइन मारने लगा. जब वो स्कूल जाती, तो मैं अपने घर के बाहर खड़ा हो जाता और इस तरह से हमारी नजरें रोज मिलने लगी थीं. अब हम एक दूसरे को देखकर मुस्कुराने भी लगे थे. शाम को जब वो अपनी छत पर होती, तो मैं भी अपनी छत पर चला जाता.
मौका देखकर हम एक दूसरे को किस का इशारा कर देते. कभी मैं लंड को मसल देता, तो वो देखकर शर्मा जाती.

लेकिन कई दिन निकल जाने के बाद भी इससे आगे कुछ नहीं हो पा रहा था. मैं बस उसके बारे में सोचकर रात को मुठ मार लेता.

एक दिन मैंने उसको इशारा किया कि रात को बारह बजे अपने घर के पीछे आना, तो उसने मना कर दिया. मैंने उस पर ज्यादा दबाव दिया, तो उसने सिर हिला कर आने की कह दी.

अब मैं बारह बजने का इंतज़ार करने लगा. बारह बजते ही मैं अपने कमरे से बाहर निकल कर पीछे की दीवार से कूद कर ऋतु के घर के पीछे जाने लगा, तो उसी समय अनुषी ने भी मुझे देख लिया. शायद वो बाथरूम जाने के लिए उठी थी.

अनुषी ने जैसे ही मुझे देखा, तो मेरी गांड फट गई. मैं सोचने लगा कि अब क्या करूँ. मैं वापस घर की तरफ आने लगा. वो मुझे देखती रही, उसने ना कोई घूंघट निकाला और ना शर्माई. मैं बहुत डर गया था.

दीवार कूद कर मैं वापस कमरे में आ गया. मेरा लंड तो जैसे मर ही गया था. मुझे लगने लगा कि कहीं उसने ये बात अपने पति को या सास को बता दी, तो मैं तो गया काम से. मेरी पूरी रात आंख ही नहीं लगी.

सुबह उठा, तो भी मन में डर था. मैंने बहुत देर सोचा, फिर जो होगा, सो ऊपर वाले की मर्जी मान लूँगा.

दोपहर तक ऐसा कुछ नहीं हुआ, तो मेरा डर दूर भाग गया. शाम को ऋतु छत पर थी, तो मैं भी अपनी छत पर आ गया.

ऋतु का मुँह उतरा हुआ था.
मैंने इशारा किया- क्या हुआ?
तो उसने कुछ लिखकर चारों तरफ देखकर एक कागज मेरी तरफ फेंक दिया.

मैंने वो कागज उठाया, तो उसमें लिखा था कि कल अनुषी भाभी ने तुम्हें देख लिया था और मुझे भी. जब तुम वापस जा रहे थे, तब मैं आ रही थी, तभी भाभी ने मुझे भी देख लिया था. भाभी ने मुझसे कहा कि ये सब छोड़ दो, नहीं तो वो घर में सबको बता देंगी. उन्होंने धमकी दी कि देख ले, आखिरी बार बता रही हूँ.

उसमें आखिर में लिखा था कि अब हमारी कोई बात नहीं होगी और हम दोनों के लिए अच्छा नहीं होगा.

उसकी इस बात पर मुझे गुस्सा आ गया. मैं उसकी अनुषी भाभी को मन ही मन गाली देता हुआ नीचे आ गया.

कुछ ही दिन बाद अमित घर वालों से अलग हो गया. उसने पीछे खेत में अलग मकान बना लिया. उसने ऊपर अपने रहने का कर लिया और नीचे भैसों का बना लिया.

अब ऐसा हो गया था कि पीछे ही आंगन था, खाली समय में वहीं हम लोग बैठते थे और उधर से अनुषी काम करते मुझे दिख जाती थी. अब तो वो मुझे देख कर घूंघट भी नहीं करती थी, बल्कि मेरी तरफ गुस्से से देखती थी.

मुझे डर लगता था कि कहीं इस पर लाइन मारी और इसने सबको बता दिया, तो कबाड़ा हो जाएगा. फिर मैंने सोची कि एक बार कोशिश करके देख लेता हूँ.

मैंने ध्यान दिया कि अनुषी जब भी अन्दर बाहर जाती, तो वो हमारे घर की तरफ जरूर देखती. मैं नीचे कमरे की खिड़की से उसको देखता रहता कि वो क्या करती है. पर उसकी नजर हमारे घर पर ही रहती. मुझे लगता मेरी हरकत देखने के लिए ही वो मेरे घर की तरफ ताड़ती है कि मैं ऋतु से बात करता हूँ कि नहीं.

मैंने सोचा कि इसका नखरा तोड़ना ही है, फिर जो होगा, सो देखा जाएगा.

अब मैं उसे ज्यादा देखने की कोशिश करने लगा और वो भी मुझे भुन्ना कर गुस्से से देखती रहती. मैंने उसे एक दिन हाथ हिला कर हाय का इशारा किया, तो वो गुस्से से देखने लगी. मेरी गांड फट गई. हालांकि कुछ हुआ नहीं.

एक दिन हमारे घर पे मैं अकेला था. ऐसे ही किसी गर्म चूत की सोचते हुए लंड हिला रहा था. मैंने सोचा आज अनुषी को लंड दिखाता हूँ, क्या पता काम बन जाए.

मैं पिछले कमरे में आ गया और दरवाजा खोल कर कमरे के कोने में ऐसे खड़ा हो गया कि अनुषी कमरे से बाहर आए, तो उसकी नजर सीधा मुझ पर पड़े.

वो जैसे ही कमरे से बाहर आयी, मैंने लंड निकाल लिया और हिलाने लगा. लंड देख कर एक बार तो वो रूकी, फिर अपना काम करने लगी. मैं मुठ मारकर नहा धोकर लेट गया.

फिर थोड़ी देर में हमारा गेट खुला, तो मैंने सोचा माँ आ गई होंगी.
तभी आवाज आई- ताई!
मैंने बिना देखे कहा- वो यहां नहीं हैं.

फिर आवाज देने वाली अन्दर आयी, तो मैंने देखा कि अनुषी आई थी. मैं डर गया और उठकर बैठ गया. मेरे पास आते ही उसने मेरे गाल पर एक थप्पड़ मारा.

अनुषी बोली- ऋतु ना मिली, तो उसकी भाभी को पटाने चला … तेरा वो काट के फेंक दूंगी, अगर फिर ये हरकत की तो.
मैं चुप रहा और गाल सहलाता रहा. वो पैर पटकते हुए चली गई. मैंने सोचा कि क्यों पड़ोस में ये हरकत कर रहा है, छोड़ इस पगली को.

अब मैंने उसकी तरफ देखना छोड़ दिया. लेकिन तब भी मैं अन्दर जाते हुए खिड़की से उसको एक बार जरूर देखता कि वो क्या कर रही है. मैंने पाया कि वो अब घर की तरफ देखने की और भी ज्यादा कोशिश करने लगी.

एक दिन मैं लेटा हुआ था. मेरी माँ रसोई में रोटी बना रही थीं. तभी अनुषी आई और मेरी माँ को कहने लगी- ताई थोड़ा दूध दे दो.

मेरी माँ दूध देने के लिए दूसरे कमरे में गईं, तो अनुषी ने मुझे चकोटी काट ली और बोली- क्या देखना भी भूल गया?

तभी मेरी माँ आ गई. उसने दूध लिया और जाने लगी. मैं उठा और उसे देखने लगा. वो अचानक से मुड़ी और उसने मुझे आंख मारी और चली गई.

बस फिर क्या था … मेरे सारे शरीर में जोश आ गया. मैं तत्काल बाथरूम में घुस गया और मुठ मारने लगा.

अब मैं फिर से अनुषी को देखने लगा. वो भी अब मुझे मुस्कुरा कर देखने लगी. मैंने मिलने का इशारा किया, तो वो गर्दन हिला कर मना कर हंसने लगी.
मैंने मुँह बनाया, तो उसने इशारा करके पूछा कि कहां और कब?
मैंने इशारों में ही बताया कि पीछे खेत में रात को एक बजे … तो वो हंस दी.

रात को मैं उठा और खेत में चला गया. वो वहां पहले ही खड़ी थी. वहां जाते ही वो मेरे गले लग गई. फिर मैंने उसका चेहरा ऊपर किया और उसके होंठ चूमने लगा. वो भी साथ देने लगी.

फिर मैंने चैन खोलकर लंड बाहर निकाल लिया. अनुषी मेरे लंड को पकड़ कर आगे पीछे करने लगी.

वो बोली- तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो … लेकिन तुम ऋतु को पटाने लगे थे, तो मुझे गुस्सा आ गया था.
मैंने कहा- छोड़ ना पुरानी बात और लंड चूस.
वो लंड चूसने की बात कहते ही मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी.

इधर खेत में आराम से चोदने की जगह नहीं थी, तो मैंने उसे खड़ा होने को कहा. वो उठी, तो मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया. उससे टांगें चौड़ी करवा कर उसकी चुत को चाटने लगा.

अनुषी मेरे सिर पर हाथ फेरने लगी. फिर वो बोली- जल्दी कर लो, वो उठने वाले हैं … भैसों को सम्भालेंगे न.

मैं उठा और उसको कुतिया सा झुका कर लंड उसकी चुत पर सैट करके झटका दे मारा. लंड चूत के अन्दर घुसते ही वो कराहते हुए बोली- आइइइ बहुत बड़ा है तेरा … आआइइ … मर गई.
मैंने और एक झटका मार कर पूरा लंड अन्दर कर दिया. वो आइइइ करने लगी.
वो बोली- जल्दी खत्म करो.

मैं चूत में लंड के झटके मारने लगा और वो ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… ’ की धीरे धीरे आवाज करने लगी. उसकी चूत गीली हो गई, तो लंड सटासट अन्दर बाहर होने लगा. मैं उसे तेजी से चोदने लगा.

वो शायद एक बार झड़ गई थी. मुझसे बोली- अभी हुआ नहीं है क्या … आआहह..

करीब 5 मिनट में झटके लगाते हुए मैं उसकी चुत में ही झड़ गया. वो सीधी हुई और बोली- बहुत हॉट हो यार.
उसने मेरे होंठ चूम लिए. फिर हमारी चुदाई की गाड़ी चल पड़ी.

एक बार अमित बाहर गया था, तो उसने मुझे बुला लिया. उसको मैंने पूरी रात चोदा. वो मुझसे तीन बार प्रेग्नेंट हुई, लेकिन उसने हर बार बच्चा गिरवा लिया. मैंने उसे कंडोम से चुदने को कहा, तो उसे कंडोम वाला सेक्स पंसद नहीं था. दवा के साइड इफेक्ट से भी वो डरती थी. अमित से उसे दो बच्चे थे, शायद अमित और बच्चे नहीं चाहता था. इसलिए वो गर्भवती होना नहीं चाहती थी.

खैर उसके साथ मेरी चुदाई की कहानी खूब चलने लगी. वो अभी परसों ही मेरे लंड से खेल कर गई है. मैंने उसे उसी के भैसों के तबेले में चोदा था.

कैसी लगी मेरी देसी भाभी की सेक्स कहानी, प्लीज़ मुझे मेल कीजिएगा.


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