भाभी मेरे लंड की दीवानी

(Bhabhi Mere Lund Ki Diwani)

गरमी के दिन थे मै ऑफिस से घर मे आकर अपने कपडे निकाल कर सिर्फ अंडरवेयर और बनियन में ही बेड पर पडा आराम कर रहा था. खुला हुआ था इसलिये मेरे लंड मे कूछ कूछ सेक्स कि उत्तेजना महसूस हो रही थी. मैं बेड पे आराम करते हुए लगभग दस मिनिट हो गये होंगे इतने मे किसीने दरवाजे पर खटखटाया. इस वक्त कौन आया होगा ये सोचते हूए मैने दरवाजा खोला और शरम के मारे चूर हो गया. सामने मालती भाभी खडी थी. मालती भाभी हमारे हि कॉलनी मे से मेरे अच्छे दोस्त कि बीवी थी. उनकी उम्र लगभग 35 होगी, वो शरीर से बडी ही मस्त और आकर्षक थी. “आईये ना अंदर” दरवाजे से हटते हुए मैने बोला. वो कमर लचकाती हुई अंदर आके बेड पर बैठ गई. मैने झट से लुंगी पहन ली और कहा “कैसे आना हुआ?”  “वैसे तो मे आपको बधाई देने आई हूँ!”  मैने थोडा आश्चर्य से पुछा “बधाई? वो कीस बात की ?” कल आपने सूरपेटी बहोत अच्छी बजाई, अभी भी वो स्वर मेरे कान मे गुंज रहे है. उनकी बात सही थी क्युंकी मैं एक कार्यक्रम मे पेटी बजा रहा था. मैने कहा “मै ऐसे ही बजा रहा था, पहले से ही मुझे संगीत का शौक है. इसीलिए मै आपको मिलने के लिए आई हुं. मुझे उनकी ये बात कूछ समज मे नही आयी मै शांत ही रह गया. वो फिर से बोली “एक बिनती है आपसे, सुनेंगे क्या ?” “आप जो कहेंगी वो करुंगा इसमे बिनती कैसी.” मैने सहजवृत्ती से कहा.

“मुझे भी संगीत का शौक है, पहले से ही मुझे सूरपेटी सिखने की इच्छा थी पर वक्त हि नही मिला…. आप अगर मेरे लिये थोडा कष्ट उठायेंगे…. मुझे सिखायेंगे तो मुझे बहोत अछा लगेगा… हमारे घर मे सूरपेटी भी है. हमारे उनसे भी मैने इजाजत ले ली है और रात का खाना होने के बाद हम तालीम शुरू कर देंगे. मुझे उन्हे ना कहना मुश्कील हो गया…मैने कहा “चलेगा, रोज रात को हम नौ से दस तालीम करेगे.” ऐसा सुनते हि उनका चेहरा खिल उठा. दो तीन दिन मे तालीम शुरू करेंगे ऐसा कबुल करके वो चली गई. तिसरे दिन मै रात को साडे नौ बजे उनके घर पहोंच गया.  “आनंद कहा है ?” मैने अंदर आते ही पूछा. आपकी राह देखकर वो सो गये, आप कहे तो मै उन्हे उठा दु ?” मैने कहा नही रहने दो. मै मालती भाभी के साथ एक कमरे मे चला गया. ये जगह तालीम के लिए बहोत अच्छी है. मालती भाभी ने सब खिडकीया बंद की और कहा “ये कमरा हमारे लिये रहेगा” एक पराई औरत के साथ कमरे मे अकेले रह के मै कुछ अजीब सा महसूस कर रहा था. मालती भाभी को देख मेरे लंड मे हलचल पैदा होने लगती थी. उस दिन उनको बेजिक चीजे सिखाई और मे चल पडा. उसके बाद कूछ दिनो मे तालीम मे रंग चढने लगा. मालती भाभी मेरी बहोत अच्छी तरह से खयाल रखती थी. चाय तो हररोज मुझे मिलती थी, कभी कभी आनंद भी आ जाता पर ज्यादा देर नही रूकता….लगता था उसका और संगीत का कूछ 36 का आंकडा था.

उस दिन शनिवार था… कुछ काम की वजह से मुझे तालीम के लिये लेट हो गया था. दस बजे मै मालती भाभी के घर गया. आज तालीम रहने दो ऐसा कहने के लिये मै गया था…. पर मैने देखा… मालती भाभी बहोत सजधज के बैठी थी. मुझे देखते हि उनका चेहरा खिल उठा. मै उनकी तरफ देखता ही रह गया बहोत ही आकर्षक साडी पहने उनकी आंखो मे अजब सी चमक थी. आज तालीम रहने दो आज सिर्फ हम तुम्हारी मेहमान नवाजी करेंगे. “मेहमान नवाजी ?” मैने खुलकर पूछा. आज वो अपने मौसी के यहां गये है …. वैसे तो मै आपको खाने पर बुलाने वाली थी लेकीन अकेली थी इसलिये नही आ सकी. उन्होन्हे दरवाजे और खिडकीया बंद करते हुए कहा. उन्होने मेरे लिये ओम्लेट और पाँव लाके दिया. मैने ओम्लेट खाना शुरू कर दिया की उन्होने अपने कपडे बदलने शुरू किये मै भी चोरी की नजरो से उन्हे देखने लगा. उन्होने अपनी साडी उतार दी और ब्लाउज भी निकाल डाला और अंदर के फ्रोक की नाडी भी छोड डाली….मेरे तो कलेजे मे धक धक सी होने लगी. मालती भाभी के शरीर पर सफेद ब्रा और ठिपकेदार नीकर थी. उनकी छाती के उपर बडे बडे स्तन ब्रा से उभरकर बाहर आ गये थे. ये दृष्य देखके तो मेरा लंड फडफडाने लगा. उनके गोरे गोरे पैर देखके मेरा मन मचलने लगा. सामने जैसे स्वर्ग की अप्सरा ही नंगी खडी हो गई हो ऐसे लग रहा था. वासना से मेरा अंग अंग थररर थररर से कांपने लगा. आज तुम नही जाओगे… आज मै अकेली हुं … और उन्होने मेरा हाथ पकड के अंदर बेडरूम मे लेके गई. मानो मेरे से ज्यादा उनको ही बहोत जल्दी थी. उनके मेक-अप का गंध पुरे कमरे मे छा सा गया था.

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मेरी हां या ना का उन्होने विचार न करते हुए मेरे कपडे उतारने शुरू कर दिये. उनकी स्पर्श से मेरा अंग अंग खिल उठा… कूछ ही देर मे उन्होने मुझे पुरा नंगा कर दिया. मेरी दो जान्घो के बीच मे खडा हुआ बहोत ही लम्बा मेरा लंड मालती भाभी देखती ही रह गई…. और अपना गाऊन निकालने लगी… “तुम्हारी होनेवली बीवी बहोत ही भाग्यशाली होगी” गाऊन निकालते हुए उन्होने कहा. “वो कैसे ?” मैने उनके गोरे गोरे पेट को देखते हुये कहा. “इतना बडा लंड जिस औरत को मिलेगा वो तो भाग्यवान ही होगी ना?” मै भी भाग्यवान हुं… क्युकी अबसे मुझे तुम्हारा सहवास मिलेगा. उन्होने पीछे हाथ लेते हुए अपनी ब्रा निकाली. मुझे उनकी साहस का आश्चर्य हुआ. झट से उनके तरबुच जैसे स्तन बाहर आ गये. उसके बाद झुक के अपनी नीकर भी निकाल दी…. गोरा गोरा शरीर पुरा नंगा मेरे सामने खडा रह गया.. मेरा लंड फडफडाने लगा. वो झटसे मेरे पास आ गई और मेरे चुंबन लेने लगी… मुझे कस के पकडा… वो तो मदहोश होने लगी थी. उन्होने अपने नाजूक हाथो से मेरा लंड हिलाना शुरू किया. और झुक के अपने होठो से चुमने लग गई… मेरे दिल मे उम्मीद सी पैदा हो गई.. उनकी ये हरकत बहोत ही अच्छी लग रही थी. मेरा लंड वो ख़ुशी के मारे चाट रही थी. मैने उनकी गांड पर हाथ रखके दबाना शुरू किया. उनके बडे बडे मुलायम नितंब हाथो को बहोत ही अच्छे लग रहे थे. बीच बीच मे उनकी चूत मे उँगलियाँ डालने लगा…. उनकी चूत गिली हो रही थी.

मैंने उनको बेड पर लीटा दिया और उनकी टांगे फैलाकर मै उनकी चूत चाटने लगा. ऐसा करते ही वो मूह से ख़ुशी के स्वर बाहर निकालने लगी. मैने भी जोर जोर से उनकी चूत चाटने को शुरू कर दिया….. उनकी टांगे फैलाकर मेरा मोटा लंड उनकी चूत पर रखा और धीरे धीरे अंदर घुसाने लगा …. उनको मेरा लंड अंदर जाते समय बहोत ही मजा आ रहा था. जोर जोर से वो चिल्ला के बोल रही थी “डालो पुरा अंदर डालो… मुझे बहोत अच्छा लग रहा है.” मेरा लंड अब सटासट उनकी चूत मे जा रहा था… मेरी रफ्तार बढ गई… मेरा पुरा लंड उनकी चूत मे जा रहा था.. भाभी ने मुझे कस के पकड लिया था. मैने भी उनके मोटे मोटे स्तन दबाते दबाते उनको चोदना चालू किया. बहोत ही मजा आ रहा था…. बीच बीच मे उनके होंठो मे होंठ डाल के नीचे से जोर जोर से लंड अंदर घुसा रहा था. नीचे से दिये धक्को से उनके स्तन जोर जोर से हिल रहे थे. उनकी सुंदर काया बहोत ही आकर्षक दिख रही थी. उनको चोदने मे बहोत ही आनंद मिल रहा था. मेरी रफ्तार इतनी बढ गई के बेड की आवाज गुंजने लगी. दोनो ही सेक्स के रंगो मे पुरे रंगे जा रहे थे. मै अपना लंड जितना उनकी चूत मे घुसा सकता था उतना जोर जोर से घुसा रहा था. इतनी ताकत से उसे चोदना चालू किया की उन्होने भी मुझे जोर से पकड लिया. मेरा वीर्य अब बाहर आने का समय हो गया था. जोर से चुत मे दबा कर मैने सारा वीर्य उनकी चूत मे ही छोड दिया और थोडी देर उनके शरीर पे ही पडा रहा. “वाह क्या… चोदा है तुमने मुझे आज मेरे पति ने भी मुझे आज तक ऐसा आनंद नही दिया है जो आज तुमने मुझे दिया है.” प्लीज मुझे जब जब वक्त मिले चोदने जरूर आ जाना” मैने कहा “मुझे भी तुम्हे चोदने मे बहोत मजा आ गया मालती”…. मै तो उन्हे अब नाम से पुकारने लगा. तुम्हे जभी चुदवाने की इच्छा होगी तब मुझे बताना मै कूछ भी काम हो छोडकर तुम्हारे पास आ जाऊंगा तुम्हे चोदने के लिए…! मालती तो मेरे लंड की जैसे दिवानी हो गई थी.



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