आर्यन एक सेक्स कथा-6

(Aryan Ek Sex Katha- 6)

हेलो दोस्तों मेरा नाम आर्यन है। मैं हरियाणा का रहने वाला हूं। यह मेरा पहला हिंदी भाग है मुझे कई सारी मेल आई कि आप हिंदी में लिखिए, बस दोस्तों हिंदी में लिखने की एक कोशिश की है आपको जरूर पसंद आएगी,अब आगे की कहानी….

उसके बाद यानी के चाची और दिव्या की चुदाई के बाद मेरी लाइफ में एक अजीब सी खुशी के दिन चल रहे थे कभी फोन पर मैं चाची से बात करता तो कभी दिव्या से। जब दिव्या कॉलेज जाती तो उसका आधा कॉलेज टाइम तो बस मेरे साथ बातें करने में चला जाता। जब मौका मिलता तो कभी चाची को चुमिया कर लेता तो कभी दिव्या के साथ अब रोज का बस यही रूटीन का काम था। यह कहानी आप decodr.ru पर पढ़ रहे हैं।

फिर एक दिन रवीना चाची ने रविंद्र के बारे में चाचा को बता दिया कि वह बार-बार मुझे कॉल करता है तो कभी मैसेज करता है, कॉल करके बोलता है, कि अगर तेरा पति चला गया हो तो आऊं क्या और गंदी गंदी बातें करता है। मैंने बहुत बार उसको समझाया है कि मैसेज और कॉल मत किया कर अगर कोई काम है तो आप सुनील के पास कॉल कर लिया करो मेरे नंबर पर नहीं। चाची ने रविंद्र के बारे में इतना कुछ बोल दिया चाचा गुस्से में लाल हो गए और उठ कर घर से बाहर चले गए

यह सुबह 10:30 बजे का टाइम था, मैं चाचा के घर ऐसे ही टाइम पास करने के लिए गया था आज चाची का यह रंग देख कर मैं भी अंदर ही अंदर डर गया था, मैं सोच रहा था कि जैसे आज चाची ने रविंद्र को फसाया है कल अगर मुझको भी जाल में फसा दिया तो पापा और चाचा तो मेरी जान ले लेंगे

तभी चाचा के जाते ही रवीना चाची बोली मेरी जान किसके ख्यालों में खो गए, तभी मैं थोड़ा चौका और हडबढ़ाते हुए चाची से बोला इसकी क्या जरूरत थी ऐसे ही चलने देती अब कहीं चाचा को हम दोनों के बारे में पता चल गया तो।
उसी टाइम चाची ने मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिए और चूमने लगी, मैंने जठ से चाची के होठों से मेरे होंठ छुड़वाए और बोला….. बोलो जान जवाब दो

चाची हंसते हुए बोली अच्छा तो सुन, मैंने उस चूतिया रविंदर को हजार बार समझाया कि मेरे पास फोन मत किया कर और ना ही कोई मैसेज वह मुझे बार-बार दिन में 50 बार फोन करता हूं और हमेशा चूदाई के सपने लेता बोलता आज तेरी चूचियां पीने का मन है तो कभी चूत का रस पीने आ जाऊं क्या रानी और कल तो उसने हद ही कर दी अपनी बुआ के लड़के सुखबीर के साथ घर आने के लिए उल्टी-सीधी बातें कर रहा था,
सुखबीर और मैं आज तेरी जम कर चुदाई करेंगे आज तेरी चूत का भूरता बना देंगे। और सुखबीर उसके पास में बैठा हंस रहा था मैंने भी उसको फोन पर ढेर सारी गालियां निकाल दी और बोल दिया तू रुक बहन के लोड़े तेरी मां और बहन मैंने ना चुदवा दी तो मेरा भी नाम रवीना नहीं।

मैंने चाची को बोला कि अगर उसने तुम दोनों की सारी बातें बता दी तो, तुम दोनों की चुदाई वाली,… और चाचा की पीठ पीछे तुम दोनों ने जो रंगरलिया मनाई हैं वह सब अगर उसने बता दिया फिर क्या होगा।

फिर रवीना चाची बोली अरे जान तुम चिंता मत करो उस गांडू की गांड में इतना दम नहीं की कुछ बोल सके, और अगर बोल भी दिया तो कोई उसकी बातों पर यकीन नहीं करेगा क्योंकि हम दोनों के बारे में तेरे सिवा किसी को कुछ पता नहीं है। और दूसरी बात अगर हम दोनों के बीच कुछ होता तो तेरे चाचा को मैं क्या बताती और आर्यन मेरी जान तुम एक महिला की ताकत को नहीं जानते जब वह अपनी इज्जत की बात पर आती है तो कितना भी बड़ा चुतीया क्यों ना हो उसको घुटनों के बल बैठा कर नाक भी रगड़ुआ सकती है। यह कहानी आप decodr.ru पर पढ़ रहे हैं,

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अब रवीना चाची और मुझको लगभग एक घंटा हो गया था और चाचा अभी तक वापस घर नहीं आए थे, दिव्या कॉलेज में गई हुई थी और निखिल स्कूल में, थोड़ी देर में चाचा पापा और 4-5 आदमी रविंदर को पकड़ कर ला रहे थे, रविंदर की नाक और मुंह से खून निकल रहा था साथ में रविंदर के पापा और मम्मी भी थे मेरे पापा पुलिस ड्रेस में थे रविंद्र की हालत बहुत खराब थी उसका पूरा मुंह सूजा हुआ था रविंदर की चाल बिगड़ी हुई थी उसे से ठीक से चला भी नहीं जा रहा था सभी चलते चलते सीधे बाहर आंगन में इकट्ठा हो गए।

चाचा सुनील ने आवाज लगाई बेटा आर्यन तेरी चाची को भेजना मैंने चाची को जाने के लिए बोला चाची वही पास वाले कमरे में अंदर बैठी थी, चाची धीरे धीरे चलती हुई आंगन में सभी के पास चली गई मैं भी सांची के साथ-साथ था वहां पहुंचते ही पापा ने चाची से पूछा बोलो बेटा क्या करना है इसका तुम चाहो तो उसको जान से मार दो ताकि दोबारा कोई किसी औरत की तरफ आंख उठाकर भी ना देख सके।

सुनील चाचा के हाथ में एक बड़ा सा डंडा था चाचा ने जोर से एक रविंदर की टांग पर मारा रविंद्र सीधा एक ही डंडे में जमीन पर लेट गया,
चाची के मुंह से एक दम निकल गया…….
साले कुत्ते अब दे गालियां जो फोन कर के दे रहा था, रविंद्र के मुंह से एक भी शब्द नहीं निकला,… चाची ने सही कहा था उस चुतीया की गांड में इतना दम नहीं है, कि कुछ बोल सके, रविंद्र के मुंह से बस लगातार खून की लार टपक रही थी मुझे रविंदर की हालत पर तरस आ रहा था रविंद्र के मम्मी पापा की आंखों में आंसू आ रहे थे और सर हमसे नजरें भी झुकी हुई थी रविंद्र की मम्मी ने चाची से कहा बेटा हम आपके हाथ जोड़ते हैं इसको माफ कर दो…

चाची बोली अरे ताई जी आप क्यों हाथ जोड़ती है आप मेरी मां समान है इसमें आपकी क्या गलती है जो यह पापी आपको मिल गया

फिर रविंद्र के मम्मी पापा पर सबको तरस आ गया और उसको छोड़ने का फैसला किया चाची ने भी बोल दिया ताऊ जी छोड़ दो इसको इसके बापू की सजा भगवान इसको देगा इसकी वजह से इसके मां-बाप को क्यों रुलाया मुझसे इनका रोना नहीं देखा जाता।

फिर पापा ने चाची को बोला ठीक है बेटा आप जाओ अंदर इसको हम देख लेंगे थोड़ी देर रविंदर को ढेर सारी गालियां पड़ी रविंदर ने सबके सामने नाक रगड़ कर माफी मांगी कि कभी किसी औरत की तरफ आंख उठाकर नहीं देखेगा फिर थोड़ी देर कहां सुनी के बाद उसको छोड़ दिया और बाहर गली में निकाल दिया रविंद्र के मम्मी पापा को वहीं पर रोक लिया था।

पापा ने मुझसे सबके लिए कुर्सियां मंगवाई मैंने 2 चक्रों में चार कुर्सी और दो प्लास्टिक के सटूल ले आया रविंदर के माता पिता को इज्जत के साथ कुर्सियों पर बैठाया और उनको हौसला दिया कि आप को रोने की जरूरत नहीं है आपको खुश होना चाहिए कि अब वह बस सुधर जाए ऐसे ही कुछ ज्ञान की बातें हो रही थी तभी चाची सबके लिए चाय ले आई पापा ने चाची से बोला बेटा इनको पिलाओ पहले रविंदर के मम्मी पापा की तरफ इशारा करते हुए कहा और हां मेरे पापा साक्षी को हमेशा बेटा कहकर ही बुलाते हैं,
चाची ने सबको चाय पिलाई और थोड़ी देर में सब शांत हो गए फिर इधर उधर की बातें हुई और सब अपने अपने घर चले गए पापा ड्यूटी से आए थे वापस चले गए कुछ पड़ोसी इकट्ठा हो गए थे वह भी सब घर चले गए और रविंदर के मम्मी पापा भी,
मैंने थोड़ी देर चाचा चाची के साथ हंसी मजाक किया और रविंदर की धूलाई की बातें की और मैं भी मेरे रूम में चला गया

दोस्तों आगे की कहानी अगले भागों में, अगर किसी भी महिला भाभी आंटी या जवान लड़की मुझसे चुदाई करवानी हो या फिर मुझको अपने साथ टूर पर या पार्टी में ले जाना चाहती हो तो बेफिकर होकर मुझे जरूर मुझे मेल करें। यह बिल्कुल सेफ और प्राइवेट रहेगा। मेरा ईमेल एड्रेस नीचे दिया गया है। यह कहानी आप decodr.ru पर पढ़ रहे हैं



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