आखिर कर ही दी मौसी की चुदाई

(Aakhir Kar Hi Di Mausi Ki Chudai)

इस चुदाई की कहानी में मैं बता रहा हूँ कि मैंने अपनी मौसी को कैसे चोदा हूँ और उसकी 18 साल की लड़की को चोदने की मेरी लालसा का क्या हुआ.

मैं अपनी मौसी के यहां जबलपुर गया था. वो मुझे देख कर बहुत खुश हुई थीं क्योंकि मैं उनके घर बहुत दिन बाद गया था. मेरी मौसी की एक लड़की भी थी, जिसकी उम्र अभी सिर्फ 18 साल थी और वो एक खिलती हुई कली थी. उधर मेरी मौसी की उम्र भी केवल 38 साल की ही थी. हालांकि वो थोड़ी सी मोटी हो गई थीं, उनकी चूचियां भी बहुत बड़ी बड़ी थीं, तब भी मेरी मौसी एक काँटा माल थीं.

एक दिन जब मौसी की लड़की पिंकी कॉलेज गई हुई थी और मैं छत पर था तब मौसी आँगन में नहा रही थीं. उन दिनों जाड़े के दिन थे, वो नहाते हुए धूप का आनन्द लेना चाहती थीं, शायद इसी वजह से खुले में नहा रही थीं.

चूंकि मैं उस वक्त छत पर था, तो मैंने देखा कि नीचे मौसी नहा रही हैं, उनके बदन पर सिर्फ एक सफेद रंग का पेटीकोट था, जिसे वो अपनी चूचियों तक चढ़ाए हुए थीं और मग्गे से पानी डालते हुए नहा रही थीं, पानी से उनका पेटीकोट भीग कर पारदर्शी हो गया था.
इसके बाद वो साबुन लगा कर अपने शरीर को रगड़ने लगीं और अपने पैर फ़ैला कर पेटीकोट को जाँघों से ऊपर उठा कर साबुन मलने लगीं. पानी में भीग जाने से पेटीकोट उनके शरीर से चिपक गया था और मुझे उनका गोरा शरीर और उनकी चूचियां साफ़ साफ़ नज़र आ रही थीं.

तभी वो अपनी चुचियों को पेटीकोट से बाहर निकाल कर उन पर भी साबुन लगाने लगीं. उनको नहाते देख कर इतनी देर में मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था. मैं अपना लंड पैन्ट से बाहर निकाल कर हाथ से रगड़ने लगा और मुठ मारने लगा.
थोड़ी देर बाद मौसी नहा कर अन्दर चली गईं और मैंने भी अपना पानी हाथ से मुठ मार कर झाड़ लिया.

अब मुझमें मौसी को चोदने की बात घर कर गई थी, पर रिश्ता ऐसा था कि कुछ कर नहीं सकता था. मौसा जी भी बहुत सख्त किस्म के आदमी थे, उनसे मैं डरता भी बहुत था. वो तो शुक्र था कि इस वक्त वो दिल्ली गए हुए थे.
मैं मौसी को चोदने की प्लानिंग करने लगा और बहुत सोचने के बाद आखिर मुझे एक तरकीब समझ आ गई.

जब रात को मौसी अपने रूम में लेटी थीं और मैं भी लुंगी पहनकर सोने जा रहा था, तभी मैंने कस के आवाज़ मारी- बचाओ बचाओ..
मेरी चीख सुन कर मौसी जल्दी से मेरे रूम में आ गईं और घबरा कर बोलीं- क्या हुआ बेटा?
मैं मौसी को देखता ही रह गया, उनका गाउन बहुत ही सेक्सी था, जिसके आगे के बटन उन्होंने खोल रखे थे और घबराहट में बटन बंद करना वो भूल ही गई थीं, जिससे उनकी लाल ब्रा नज़र आ रही थी.

मैंने डरते हुए कहा- मौसी मुझे बहुत बुरा सपना आया था..
यह कहते हुए झट से उनसे चिपक गया. वो पहले तो झिझकीं फ़िर दोनों हाथ बढ़ा कर मुझको अपने शरीर से चिपका लिया.

चूंकि मैं बिस्तर पर बैठा था और वो ज़मीन पर खड़ी थीं, तो उनकी चूचियां मेरे मुँह के पास थीं. मैं उनकी चूचियों को जोर से अपने मुँह से दबाते हुए बोला- मौसी मुझे बहुत डर लग रहा है.. प्लीज़ आप आज मेरे साथ सो जाइए.
तब मौसी ने कहा- धत्त… तुम तो बच्चों की तरह डर रहे हो.. तुम 22 साल के हट्टे कट्टे मर्द होकर भी डरते हो.
ये कहते हुए मौसी वहीं बैठ गईं और बोलीं- अच्छा तू सो जा, मैं अभी यहीं बैठी हूँ. जब तू सो जाएगा तब मैं चली जाऊंगी.

मैं सोने का नाटक करने लगा. मौसी ने अभी भी बटन बंद नहीं किए थे.

अब मैं धीरे धीरे अपनी लुंगी ऊपर को सरकाने लगा. आज मैंने नीचे जानबूझ कर कुछ भी नहीं पहना था. मैंने अपनी लुंगी पैरों के दोनों तरफ़ को सरका दी और मेरा खड़ा लंड अब बिल्कुल साफ़ दिख रहा था.
मैंने मुंदी आँखों से देखा कि मौसी मेरे खड़े लंड को बहुत गौर से देख रही थीं. मुझे आभास हो गया कि आज मौसी को चोदने का मजा मिल जाएगा. पर थोड़ी देर बाद ही मेरे अरमानों पर पानी फ़िर गया. मौसी ने आगे बढ़ कर कुछ देर ध्यान से लंड देखने के बाद लुंगी को मेरे लंड पर चढ़ा दिया और अपने कमरे में चली गईं.
मैं मन मसोस कर और लंड हिलाता रह गया.

दूसरे दिन सब कुछ सामान्य रहा, पर एक बात नोट की. मैंने देखा कि आज मौसी मुझे अज़ीब सी नज़रों से देख रही थीं.
आज रात को मैंने सोने से पहले मौसी से कहा- मौसी प्लीज़ आज आप मेरे रूम में सो जाओ, कल आपके जाने के बाद बहुत बुरा सपना आया था.
मौसी शायद मेरे दिल की बात भांप गई थीं या मेरा खड़ा बड़ा लंड देख कर उनकी चूत में भी खलबली हो गई थी.
उन्होंने कहा- ठीक है बेटा.

आज भी रात को मैंने सिर्फ लुंगी ही पहनी थी और आज तो मौसी ने बहुत ही सेक्सी छोटी सी फ्रॉक जैसी नाइटी निकाल कर पहनी थी. मगर मौसी मोटी थीं तो उन पर ये फ्रॉक अच्छी नहीं लग रही थी.
शायद जब मौसी की नई नई शादी हुई थी, तब ही मौसा ने लाकर दी होगी. उस वक्त मौसी बहुत स्लिम हुआ करती थीं. अब तो पेट निकल आने की वजह से वो फ्रॉक बहुत कसी सी हो गई थी और उनकी चूचियों के पास वाला हिस्सा भी बहुत उभरा हुआ दिख रहा था क्योंकि चूचियां भी पहले की अपेक्षा काफी बड़ी हो गई थीं, जिससे वो फ्रॉक ज़बरदस्ती उनकी चूचियों को बांधे हुए सी लग रही थी.

खैर उनके आने के बाद मैंने कहा- मौसी आज जाइएगा नहीं और यहीं मेरे बगल में सो जाइए.
मौसी मेरे बगल में बैठ गईं और उन्होंने अपने पैरों को फ़ैला लिया. वो मेरे बिल्कुल सामने बैठी हुई थीं. पैर फ़ैलाने से उनकी नाइटी और ऊपर खिसक गई थी.

जब मैंने देखा तो मुझे 440 बोल्ट का झटका लग गया, मौसी नीचे कुछ भी नहीं पहने हुए थीं. उनकी पाव की तरह उभरी हुई चूत साफ़ दिख रही थी. मैं उनकी तरफ़ ही देख रहा था और सोच रहा था कि मौसी मेरा ही फार्मूला मुझ पर आजमा रही हैं. कल मैंने उनको अपना लंड दिखाया था और आज वो मुझे अपनी चूत दिखा रही हैं.

खैर मैं लेट गया और सोने का नाटक करने लगा. थोड़ी देर बाद मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरी लुंगी के ऊपर हाथ फ़ेर रहा है, पर मैं वैसे ही लेटा रहा. अचानक मौसी ने अपना हाथ अन्दर घुसेड़ दिया और मेरा लंड मुठ्ठी में लेकर सहलाने लगीं, जिससे लंड अपनी औकात में आने लगा. पर मैं तब भी वैसे ही पड़ा रहा ऐसा दिखा रहा था जैसे मुझे बहुत गहरी नींद आ गई हो.

फ़िर मौसी ने मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. अब तो मुझे अपने आपको रोकना बहुत ही मुश्किल हो गया था क्योंकि किसी भी आदमी का लंड जब कोई औरत अपने नरम और मुलायम होंठों से चूसती है तो कितना मजा आता है. यहां तक कि उसकी सिसकारियां भी निकलने लगती हैं. पर मैंने बहुत संयम बनाए रखा. क्योंकि मैं मौसी की आगे की हरकत देखना चाहता था.

आखिर उन्होंने चूस चूस कर मेरा पानी निकाल दिया और फ़िर वहीं चादर से मेरा लंड पोंछ दिया और अपने रूम में जाकर सो गईं.

दूसरा दिन भी सामान्य ही रहा. आज मैंने मौसी से कहा कि कल बहुत अच्छी नींद आई थी.
तब मौसी ने कहा कि बेटा आज भी मैं तेरे बिस्तर पर ही सो जाऊंगी, तब और अच्छी नींद आएगी.

रात को मौसी मेरे रूम में आईं, मैंने आज अंडरवियर भी पहन लिया था. मौसी रूम में आईं और फ़िर इधर उधर कि बातें करने लगीं. बात करते हुए वो मेरे करीब आ गईं और बोलीं कि तुम बहुत गहरी नींद में सोते हो तुम्हें अंडरवियर पहन कर सोना चाहिये. कल मेरे जाने के बाद बिल्ली आई थी और तेरी लुंगी तेरे लंड से हटी हुई थी, तब वो उसे चाट रही थी. अगर कहीं काट लेती तो क्या होता?
मैं उनके मुँह से लंड सुनकर मन ही मन मुस्कुरा गया.

फ़िर मैंने अपनी लुंगी हटाते हुए कहा- मौसी, आज मैंने निक्कर पहना हुआ है आज बिल्ली नहीं चाट पाएगी.
तब मौसी ने कहा- बेटा दिखाना जरा… मैं देखूँ कि कहीं कल बिल्ली ने दांत के निशान तो नहीं मारे, नहीं तो सेप्टिक हो जाएगा.

मौसी ने मेरी लुंगी हटा कर अंडरवियर को खींच कर उतार दिया. मेरा लंड किसी डंडे की तरह अकड़ रहा था और मौसी लंड को हाथ में लेकर बहुत गौर से देख रही थीं. साथ ही मौसी मेरे लंड को धीरे धीरे सहला भी रही थीं, जिससे मुझे बहुत मजा आ रहा था.

कुछ देर बाद वो मेरे लंड को मुँह में भर कर चूसने लगीं, तब मैंने कहा- मौसी ये क्या कर रही हो आप.. मैं आपके बेटा के समान हूँ.
तब मौसी बोलीं कि बेटे के समान है तो ले तू मेरा दूध पी ले..
उन्होंने अपनी नाइटी एक ही झटके में उतार दी उनकी बड़ी बड़ी चूचियां मेरी आँखों के सामने बिल्कुल नंगी थीं. मैं मौसी के मम्मों को बहुत जोर से दबाने लगा. उनकी बड़ी बड़ी चूचियां हाथ में नहीं आ रही थीं. मैं अपने दोनों हाथ से उनकी एक चुची दबा रहा था और एक चूची के निप्पल को दांत से काट रहा था, जिससे उनको भी बहुत मजा आ रहा था.

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उसके बाद वो बिस्तर पर लेट गईं और उनके पेट की वजह से उनकी चूचियां दाएं बाँए हिल रही थीं. मैंने उनकी चूत पर एक चुम्मा लिया, वो जोर से सिसक पड़ीं. मैंने उनकी चूत चुसाई शुरू कर दी और उनको एक बार झाड़ दिया.
वो बोली- बेटा आज मैं तुझे ऊपर से चोदूँगी.
मैंने हाथ जोड़ लिए और बोला- मौसी मुझे माफ़ कर दो, मेरा दम निकल जाएगा.. आप इतनी मोटी हो.
तब वो हंसने लगीं.
फ़िर मैंने कहा- आपको आज मैं ऐसे तरीके से चोदूँगा, जिससे आपको भी बहुत मजा आएगा.
वो बोलीं- चोदो राजा.. अब तो चूत तेरे हवाले है.

मैंने उनको बिस्तर पर हाथ रख कर नीचे खड़ा किया और पीछे से उनकी चूत में लंड फंसा कर एक जोरदार धक्का दे मारा. मौसी ‘आह्हह आआह्ह..’ की आवाज़ करते हुए बिस्तर पर ढुलक गईं और मैं धक्के लगाने लगा.
मैं बहुत जोर जोर से उनकी चूत चुदाई कर रहा था और अब वो भी अपने चूतड़ों को आगे पीछे करके चूत चुदाई का मजा ले रही थीं.
जब मैं उनको पीछे से चोद रहा था तब उनकी भारी गांड देख कर मैंने उसी वक्त सोच लिया था कि उनकी गांड ज़रूर मारूंगा.

उस रात मैंने मौसी को 3 बार चोदा और उसी हालत में हम दोनों नंगे ही सो गए.

सुबह जब पिंकी स्कूल चली गई, तब करीब दस बजे मेरी मौसी बिस्तर पर आईं और मेरी चादर हटा दी. मैं तब नंगा ही सोया हुआ था. मौसी धीरे धीरे मेरे लंड को सहलाने लगीं और अचानक ही उन्होंने मेरे लंड को जोर से दबा दिया.
मैं हड़बड़ा कर उठ गया और मौसी की तरफ़ देखने लगा. मैं मौसी को देखता ही रह गया, वो सिर्फ ब्रा और पेंटी में ही थीं और मेरी तरफ़ किसी छिनाल की तरह देख रही थीं. उनका हाथ अभी भी मेरे लंड पर था.

तब मैंने कहा- मौसी रात को 3 बार चोदा, अभी मन नहीं भरा क्या?
मौसी हंस कर बोलीं- बेटा, तेरी जवानी के साथ ही मुझे भी जवानी आ गई है. तूने ऐसी जमकर चुदाई की है कि आज तक तेरे मौसा ने भी नहीं की.. जबकि उनका लंड भी बहुत लम्बा और सख्त है.
तब मैंने कहा- मौसी अब मौसा बुड्डे हो गए हैं, पर जब जवान रहे होंगे, तब तो तुझे खूब मज़े आते होंगे.
मौसी ने कहा- हां चलो.. अब नहा लो फ़िर मैं तेरे लिए नाश्ता बना देती हूँ.
मैंने कहा- आप भी मेरे साथ नहाएंगी?
मौसी ने कहा- नहीं.

पर मैं उनका हाथ पकड़ कर बाथरूम में खींच ले गया और शावर खोल दिया मौसी ने अपनी ब्रा उतार दी. अब उनकी बड़ी बड़ी दूध से भरी चूचियां लटक गईं और मैं अपने हाथ से मम्मों को दबाने लगा.
वो अपने हाथ को मेरे लंड पे ले गईं और लंड को जोर से मसल दिया. मैंने कहा कि मौसी लंड को साबुन लगा कर मलो.
फ़िर मौसी मेरे लंड पे साबुन मलने लगीं और थोड़ी देर में ही ढेर सारा झाग बन गया.
मौसी ने कहा- बेटा तू भी तो मेरी चूत को साफ़ कर दे.

मैंने भी साबुन उठा कर उनकी चूत पर रगड़ना शुरू किया और थोड़ी देर में ही उनकी चूत भी झाग से भर गई.
वो बोलीं- बेटा अब अपना झाग से भरा हुआ लंड मेरी बुर में पेल दो.
मैं हंसने लगा क्योंकि मेरा इरादा तो कुछ और ही था, मैंने कहा- अभी थोड़ा और मजा ले लो मौसी.

मैं उनकी चुची को मुँह में भर कर चूसने लगा. उनकी चुची चूसने में मुझे बहुत मजा आता था क्योंकि मेरी मम्मी और बहन की चूचियां छोटी छोटी थीं. पर मौसी की चूचियां बहुत बड़ी बड़ी थीं. फ़िर मैं अपने हाथ को पीछे से उनकी गांड पर ले गया और सहलाने लगा. धीरे धीरे अपनी एक उंगली उनकी गांड में डाल दी.

तब मौसी उचक पड़ीं और बोलीं- बेटा क्या इरादा है.. कहीं मेरी गांड तो नहीं मारनी है ना?
मैंने कहा- मौसी आप सही सोच रही हैं. मैं आपकी गांड ही मारना साहता हूँ.
मौसी ने हाथ जोड़ कर कहा- नहीं बेटा मुझ पर दया करो, मैंने आज तक कभी गांड नहीं मरवाई है और तुम्हारा लंड भी बहुत लम्बा है. मैं गांड नहीं मरवाऊंगी.
मैंने कहा- साली रंडी नखरे करती है. सीधे सीधे मरवा ले नहीं तो ज़बरदस्ती लंड पेल दूँगा.. और पूरा लंड एक ही बार में घुसेड़ दूंगा, वो भी बिना तेल साबुन लगाए.

अब तक मौसी ठंडी पड़ गई थीं. उन्हें मेरे इस रूप की उम्मीद नहीं थी. फ़िर वे बोलीं- अच्छा तुम अपनी उंगली मेरी गांड में डाल देना.
मैंने कहा- ठीक है.

पर मेरे मन में तो कुछ और ही था, मैंने जाहिर नहीं किया और उनकी गांड पर अपना हाथ ले जाकर सहलाने लगा. फ़िर मैं मौसी की गांड को चूमने लगा और कभी कभी दांत से हल्के से काट भी लेता.
मैंने साबुन उठा कर उनकी गांड पर बहुत सारा झाग बनाया और उनकी गांड के छेद में धीरे धीरे अपनी उंगली अन्दर बाहर करने लगा.

मौसी ‘आआह आआह्हह..’ कर रही थीं. इसी बीच मैंने अपने लंड पर भी साबुन लगा कर चिकना कर लिया. अब मैं अपने लंड का सुपारा मौसी की गांड पर टिका कर घिसने लगा और धीरे से धक्का दे मारा. मौसी की चीख निकल गई- आआह्ह मर गईईईई.. राअम्मम्म रे.. ऊफ़्फ़ बाहर कर लो बेटा.. बहुत दर्द हो रहा है.

मैंने लंड फंसाए हुए कहा- मौसी अभी थोड़ा सहन कर लो.. फिर आपको बहुत मजा आएगा.
मौसी चुप हुईं तो मैंने एक और करारा धक्का दे मारा. मौसी फिर से कराह पड़ीं- आह्हह माअर डाल ज़ालिम साले.. क्या आज मार के ही दम लेगा क्या.. आह भोसड़ी के छोड़ दे..

मौसी के मुँह से गाली सुन कर मुझे बहुत जोश आ गया और मैंने उनकी गांड में अपना पूरा मूसल पेल कर धकापेल झटके मारने लगा. थोड़ी देर बाद मौसी को मजा आने लगा और फ़िर वो कुछ देर बाद झड़ गईं.

मैंने अपनी मोटी मौसी की गांड मार ली थी और अब तो मौसी के सभी छेद रमा हो गए थे.

एक हफ्ते में मैंने मौसी की चूत का भोसड़ा बना डाला था और कई बार गांड भी मार चुका था. मेरा मन अब मौसी से भर चुका था, पर मौसी की चूत की आग ठंडी ही नहीं होती थी.

एक दिन मैंने पिंकी को स्कूल ड्रेस में देखा तो देखता ही रह गया. उसने छोटी सी स्कर्ट पहन रखी थी, जो उसके घुटनों के काफी ऊपर थी. स्कर्ट से उसकी चिकनी और गोरी जांघें साफ़ नज़र आ रही थीं. चूंकि उसकी स्कर्ट काफी कसी हुई थी जिस वजह से उसकी गांड काफी तनी सी दिख रही थी. ऊपर उसकी तोप जैसी चूचियों की छोटी सी घुंडियां नज़र आ रही थीं.

मेरा मन एकदम से अपनी प्यारी बहन पर डोल गया. मैंने उस वक्त तो सिर्फ उसके गाल पर हाथ ही फ़ेर कर अपना काम चला लिया.

रात को जब मौसी अपनी नंगी चूत लेकर मेरे पास आईं, तब मैंने उन्हें कोई तवज्जो नहीं दी. मौसी बहुत देर तक मुझे रिझाती रहीं. पर आखिर में थक कर बोलीं- बेटा राजेश क्या बात है? आज मूड नहीं है क्या?
मैंने कहा कि मौसी आज किसी टाईट बुर वाली को चोदने का बहुत मन कर रहा है.
मौसी ने कहा- मेरी ही गांड को बुर समझ कर मार लो.

मैं हंसने लगा और उनकी गांड जम कर मारी. आज मैंने इतना तेज गांड बजाई थी कि उनकी चीखें निकल गईं.

उसके बाद मैंने कहा- मन अभी भी किसी कुंवारी चूत को चोदने का ही कर रहा है.. अब क्या करूँ?
तब मौसी ने कहा- बेटा मेरे पड़ोस में कोई भी कमसिन लड़की नहीं रहती वरना मैं तेरा काम ज़रूर बनवा देती.
मैंने झिझकते हुए कहा- मौसी पिंकी तो है.
मौसी ने मुझे एकदम से डांट दिया और भड़कने लगीं.

मैंने कहा- साली ज्यादा नखरे ना कर, मुझसे अपनी चूत चुदवाती है और गांड मरवाती है.. तो लड़की को भी चुदवा दे ना.. सारी उम्र आपका एहसान नहीं भूलूँगा.. और आप जब भी कहोगी आपकी चूत की सेवा में हाजिर रहूँगा. यही नहीं मौसी मैं अपने दोस्तों को भी आपकी चूत मारने की दावत दूँगा आपकी लाइफ मज़े से बीतेगी. मेरे कई पहलवान दोस्त हैं जिनको आप जैसी भारी चूतड़ों और बड़ी बड़ी चूचियों वाली औरतें चोदना पसंद हैं.

मौसी थोड़ा शांत हो गईं फिर बोलीं- बेटा पिंकी अभी छोटी है.. अभी उसकी उम्र ही क्या है.. सिर्फ 18 की हुई है… उसकी चूत फ़ट जाएगी. तुम्हारा लंड भी तो इतना लम्बा और मोटा है.
मैंने कहा- मौसी मैं अपना पूरा लंड उसकी चूत में नहीं डालूँगा, बस थोड़ा सा डालूंगा और चूचियों की चुसाई का मजा लेकर काम चला लूँगा.
मौसी ने कहा- साले, तेरी बात का कोई भरोसा नहीं है.. कहीं अपना पूरा लंड मेरी बेटी की चूत में पेल दिया तो बेचारी मर ही जाएगी.
मैंने कहा- अगर आपको यकीन नहीं तो आप भी साथ में रहना.

फ़िर आखिर में मौसी राजी हो ही गईं. उन्होंने कहा- आज तो तुम मुझसे ही काम चलाओ, कल मैं तुम्हारे लिए पिंकी को तैयार कर दूँगी.
यह सुन कर मैंने मौसी की तरफ लंड कर दिया.. मौसी ने झट से मेरे लंड को मुँह में भर लिया और चूसने लगीं.. जिससे मेरा लंड अपनी पूरी औकात में आ गया.

मैंने मौसी से कहा- आप इतने दिन से मुझे नीचे से चोदने को कह रही थीं. आज आपकी बेटी की सील तोड़ने की बात पर मैं आज आपको पूरी छूट देता हूँ.. चाहे जिस तरह से मेरे लंड से चुदवा लो.

मौसी मुझे ज़मीन पर लिटा कर मेरे ऊपर आ गईं. उनके वजन से मेरी जान निकल गई.. उनका वजन काफी था.
बैठने तक तो ठीक था लेकिन जब वो धपाधप मेरे लंड पर कूदने लगीं, तब बस इतना समझ लीजिये कि मेरी चटनी ही नहीं बनी.

लेकिन मौसी की बेटी की चुदाई का दिन कभी नहीं आया.


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